रक्कड़ में शिव महापुराण कथा महोत्सव का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
रक्कड़ (कांगड़ा)। जिसे सिद्धि चाहिए वह मनुष्य भगवान शिव की आराधना अवश्य करे। संयमपूर्वक की गई साधना सफलता प्रदान करती है। एकमात्र भगवान शिव का पूजन करने से सभी की पूजा हो जाती है। प्रभु के भजन से ही दुख मिटता है। अपने दुखों के लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं। अभी हम अपने दुखों के लिए या तो परमात्मा को दोषी मानते हैं या दूसरों को। यही भ्रम हमें सफलता के करीब नहीं पहुंचने देता। ईश्वर तो सदैव हमारे साथ है। कमी हमारी ओर से है प्रभु की ओर से नहीं। ये कथासूत्र शिव महापुराण कथा महोत्सव के छठे दिन स्वामी अतुल कृष्ण ने नाग मंदिर रक्कड़ में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि परमात्म शांति को प्राप्त मनुष्य संसार के बंधन में नहीं फंसते। प्रवृत्ति में आसक्त होना बंधनकारी है, लेकिन भगवान में आसक्ति कल्याणप्रद है। जहां दृढ़ श्रद्धा एवं तीव्र ईश्वर चिंतन होता है, वहां प्रकृति भी अपना नियम बदल देती है। भक्त की रक्षा के लिए पंचभूत भी अपना स्वभाव छोड़ देते हैं। होलिका प्रह्लाद को एवं रावण हनुमान को तभी नहीं जला सके। दुष्ट वृत्ति पर श्रेष्ठ भाव की विजय हुई। जिसकी स्मृति दृढ़ निष्ठा से युक्त है, विश्वंभर परमात्मा उसकी रक्षा करते हैं। हम अपने विकास के लिए स्वार्थ को नहीं परमार्थ को चुनें। प्रभु भक्तों की यह विशेषता है कि वे सब में अपना ही प्रतिबिंब देखते हैं। इसी कारण उनका किसी से वैर-विरोध नहीं होता। वीरवार को कथा में सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर एवं केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की महिमा लोगों ने अत्यंत श्रद्धा से सुनी।