ताजमहल का टेंडर...धर्मशाला कॉलेज में ओडिटोरियम में दो दिवसीय नाट्योत्सव में ताजमहल का टेंडर न
धर्मशाला। धुनिक दुनिया की जटिल कार्यप्रणाली और सरकारी लालफीताशाही के आगे आखिरकार शाहजहां भी हार गया। व्यवस्था के पेच ऐसे फंसे कि लगभग 25 वर्षों तक ताजमहल का निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो पाया।
एनएसडी रंगमंडल नई दिल्ली और भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘हिम रंग षष्ठी ग्रीष्मकालीन नाट्योत्सव’ के धर्मशाला संस्करण का सोमवार को राजकीय महाविद्यालय के अंतरंग सभागार में शानदार शुभारंभ हुआ। उद्घाटन अवसर पर मंडलायुक्त कांगड़ा संदीप कुमार बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। नाट्योत्सव के दूसरे दिन रंगमंडल की चर्चित प्रस्तुति ‘बाबूजी’ का मंचन किया जाएगा।
नाटक की शुरुआत मुमताज के शाहजहां के ख्वाबों में आकर ताजमहल मांगने से होती है। शाहजहां इस विचार को लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता गुप्ता से साझा करते हैं, जो उनके समक्ष 168 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखते हैं। शाहजहां इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तुरंत मंजूरी देकर सात दिनों में काम शुरू करने के निर्देश देते हैं, लेकिन यहीं से शुरू होता है फाइलों का अंतहीन सफर। संवाद