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Kangra News: पत्नी को हर माह देने होंगे सात हजार रुपये, घरेलू हिंसा पर भी रोक

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धर्मशाला। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. हकीकत धांडा की अदालत ने घरेलू हिंसा के मामले में पति को पत्नी को हर माह सात हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं। इसमें पांच हजार रुपये भरण-पोषण और दो हजार रुपये आवास के लिए देने होंगे।
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अदालत ने पति को पत्नी के साथ घरेलू हिंसा करने से भी प्रतिबंधित किया है। मामले के अनुसार आशा देवी की शादी 21 जुलाई 2021 को सुधेड़ में हुई थी।
आशा देवी ने आरोप लगाया कि शादी के करीब एक माह बाद ही पति का व्यवहार बदल गया और वह उसके साथ मारपीट, दुर्व्यवहार और अपमान करने लगा। उसने पति पर चरित्र पर संदेह करने और मायके वालों से बातचीत करने से रोकने के आरोप भी लगाए।
गर्भावस्था के दौरान भी मारपीट करने का आरोप लगाया गया। बेटी के जन्म के बाद आशा देवी अपने मायके में रहने लगी। पत्नी ने अदालत में याचिका दायर कर सुरक्षा, आवास, भरण-पोषण और मुआवजे की मांग की थी।
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वहीं, पति ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि पत्नी अपनी मर्जी से मायके गई है और वह उसे साथ रखने के लिए तैयार है। अदालत ने दोनों पक्षों के बयानों और साक्ष्यों का मूल्यांकन करते हुए पाया कि पति पत्नी और बेटी के भरण-पोषण के लिए कोई राशि नहीं दे रहा था।
पति ने अदालत में बताया कि वह खाद्य वाहन में काम करता है और उसे आठ हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। इससे अधिक आय का कोई प्रमाण भी पेश नहीं किया गया। अदालत ने माना कि पत्नी और नाबालिग बेटी का भरण-पोषण नहीं करना भी घरेलू हिंसा के दायरे में आता है।
इसके बाद अदालत ने पति को पत्नी को हर माह पांच हजार रुपये भरण-पोषण और दो हजार रुपये आवास के लिए देने के आदेश दिए। साथ ही, पत्नी के खिलाफ घरेलू हिंसा करने पर भी रोक लगा दी।
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