धर्मशाला। दुकान में घुसकर महिला पर अश्लील टिप्पणियां करने और धमकी देने के दो आरोपियों पर निचली अदालत में दोषसिद्धी के फैसले को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पालमपुर धीरू ठाकुर की अदालत ने बरकरार रखा है। दोषियों पर महिला पर अश्लील टिप्पणियां करने, अपमानित करने और धमकी देने के आरोप लगे थे। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी बैजनाथ की अदालत ने दोषियों को एक वर्ष 2 माह के कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ दोषियों ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पालमपुर में अपील दायर की थी।
जानकारी के अनुसार 14 जनवरी 2014 को बैजनाथ उपमंडल स्थित एक मोबाइल फोन दुकान में कार्यरत महिला पर क्षेत्र के दो आरोपियों ने अश्लील टिप्पणियां की थीं। विरोध करने पर महिला और दुकान संचालक को गालियां दीं और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।
शिकायत के आधार पर बैजनाथ थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई। मामले की जांच के बाद पुलिस ने चालान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी बैजनाथ में पेश किया। इस पर 31 मई 2018 को एक दोषी को आईपीसी की धारा 294, 354-ए, 504 और 506 और दूसरे दोषी को धारा 504 और 506 के तहत दोषी ठहराते हुए कारावास की सजा सुनाई थी।
इस फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने पाया कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य और पीड़िता की गवाही विश्वसनीय है और निचली अदालत का निर्णय कानून और तथ्यों के अनुरूप है। अदालत ने दोषियों की अपील खारिज करते हुए उनकी सजा को यथावत रखा। अदालत ने कहा कि अश्लील टिप्पणी से पीड़िता को मानसिक पीड़ा हुई है। इस कारण अदालत ने पीड़िता को पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत मुआवजा दिए जाने पर विचार करने के लिए संबंधित उपमंडलीय विधिक सेवा प्राधिकरण को अनुशंसा भेजने के निर्देश दिए हैं। अपील खारिज होने के बाद जमानत पर चल रहे दोनों दोषियों को शेष सजा भुगतने के लिए हिरासत में लेने के आदेश भी जारी किए गए।