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Kangra News: बंजर जमीन में बोए खेल के बीज, निकले सितारे

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ग्राउंड गुरु..जमानाबाद के मिहालू में खड्ड के किनारे कबड्डी कोच सुरेश खैरा की अकादमी में अभ्
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धर्मशाला। नौकरी से रिटायर हुए लेकिन खेल मैदान से नहीं...। उम्र के इस पड़ाव पर जहां लोग अमूमन आराम की जिंदगी चुनते हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश युवा सेवाएं एवं खेल विभाग से कबड्डी कोच के पद से सेवानिवृत्त सुरेश खैरा 11 वर्षों से युवाओं के भविष्य की नींव मजबूत करने में जुटे हैं।
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सूरज की पहली किरण फूटते ही जमानाबाद में खड्ड किनारे बने कबड्डी कोर्ट में उनकी सीटी गूंजने लगती है। सुबह ठीक 5:30 बजे मैदान में उतरकर लगातार दो घंटे तक युवाओं को कबड्डी के गुर सिखाना उनकी दिनचर्या का अटूट हिस्सा बन चुका है। अब तक करीब 8000 युवाओं को प्रशिक्षित कर चुके खैरा के लिए यह महज एक खेल नहीं, बल्कि ग्रामीण माटी से नई खेल प्रतिभाओं को तराशने का अटूट जुनून है।
खिलाड़ियों को बेहतर माहौल देने के लिए उन्होंने जमानाबाद के मिहालू गांव के समीप खड्ड किनारे पड़ी बंजर जमीन को स्थानीय युवाओं के सहयोग से खुद कबड्डी कोर्ट में तब्दील किया। इसी मैदान पर वह हर रोज युवाओं को फिटनेस, रेडिंग, डिफेंस, तकनीक और खेल की बारीकियों का कड़ा अभ्यास करवाते हैं। अपने सेवाकाल के दौरान सिरमौर, किन्नौर, कुल्लू और कांगड़ा जिलों में सेवाएं देते हुए उन्होंने हमेशा दूरदराज के क्षेत्रों से प्रतिभाएं तलाशने पर जोर दिया। बिलासपुर खेल छात्रावास में 2013-14 के दौरान तैनाती में भी उन्होंने खिलाड़ियों को तराशा।
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तराशे गए प्रमुख चेहरे
रोहित राणा: प्रो-कबड्डी और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके दिग्गज डिफेंडर।
रितू नेगी: भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान/अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी।
प्रियंका नेगी: अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी और राष्ट्रीय स्तर पर पदक विजेता।
उपलब्धि: जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में खैरा के प्रशिक्षित दर्जनों खिलाड़ी कर चुके हैं हिमाचल का प्रतिनिधित्व।


ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत उन्हें सही मार्गदर्शन और अभ्यास का अवसर देने की है। इसी उद्देश्य से मैं लगातार युवाओं को मैदान से जोड़ने में जुटा हुआ हूं। मेरे लिए खिलाड़ियों की सफलता ही सबसे बड़ा सम्मान है। अगर कबड्डी मैट उपलब्ध हो तो युवाओं को और बेहतर प्रशिक्षण दिया जा सकता है। - सुरेश खैरा, कबड्डी कोच
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