धर्मशाला। पारिवारिक कलह के चलते बच्चों को लेकर मायके में रह रही पत्नी को परिवार न्यायालय देहरा ने पति के पास लौटने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने पति के हक में फैसला सुनाते हुए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-9 के तहत दायर दांपत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना याचिका मंजूर कर ली है। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश सपना पांडेय की अदालत ने महिला को बच्चों सहित वैवाहिक घर लौटने का आदेश दिया।
डाडासीबा क्षेत्र निवासी व्यक्ति ने पत्नी के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी। दोनों का विवाह अप्रैल 2008 में हुआ था और उनके तीन बच्चे हैं। पति का आरोप था कि दूसरी बार गर्भवती होने पर सास ने बेटी होने की आशंका जताकर गर्भपात की सलाह दी थी, जिसका उसने विरोध किया। इसके बाद मई 2011 में दूसरी बेटी का जन्म हुआ।
पति के अनुसार उसने पत्नी के लिए बुटीक खुलवाया और परिवार के भरण-पोषण के पूरे प्रयास किए, लेकिन बाद में बच्चों की निजी स्कूल फीस को लेकर विवाद गहरा गया। आर्थिक तंगी के कारण वह बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाना चाहता था। इसके चलते पत्नी बच्चों सहित मायके चली गई। आरोप है कि पत्नी ने साथ रहने के लिए घर जमाई बनने की शर्त रखी।
पति ने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 के बाद पत्नी ने बातचीत बंद कर बच्चों से मिलने पर रोक लगा दी और नूरपुर अदालत में तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। समझौते के प्रयास विफल होने पर पति ने देहरा परिवार न्यायालय का रुख किया। सुनवाई के दौरान पत्नी के उपस्थित न होने पर अदालत ने उसे एकतरफा घोषित कर दिया और सभी तथ्यों पर विचार के बाद पत्नी को बच्चों समेत पति के पास लौटने का फैसला सुनाया।