धर्मशाला। ओबीसी, एससी और एसटी समुदायों ने शनिवार को धर्मशाला में एकजुट होकर यूजीसी के नए नियमों के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद की। दाड़ी मेला ग्राउंड में सुबह से ही प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से लोग एकत्रित होना शुरू हुए, जिसके बाद एक विशाल रोष रैली निकाली गई। यह रैली मुख्य बाजारों से होती हुई उपायुक्त कार्यालय पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने घंटों तक अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।
वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल नियमों के समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शोषित वर्गों के भविष्य और सांविधानिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। प्रदर्शन के दौरान डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के खिलाफ भी नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि मंडल कमीशन की सिफारिशों का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री का रुख हमेशा इन वर्गों के हितों के विपरीत रहा है। शांता कुमार ने उन याचिकाओं का समर्थन किया था जो ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के विरोध में थीं।
रैली के अंत में जिला प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के राज्यपाल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मांग की गई कि 93वें संविधान संशोधन को पूरे प्रदेश में सख्ती से लागू किया जाए। सरकारी सेवाओं में आरक्षित वर्गों के रिक्त पदों को तुरंत विशेष अभियान चलाकर भरा जाए।प्रदेश में ओबीसी जातिगत जनगणना की प्रक्रिया शुरू की जाए ताकि वास्तविक आंकड़ों के आधार पर नीतियां बन सकें। ओबीसी प्रमाणपत्र की वैधता को आजीवन किया जाए, ताकि युवाओं को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।
2027 में दिखाएंगे ताकत, नहीं मांगेंगे भीख
अब हम भाजपा या कांग्रेस से अपने अधिकारों की भीख नहीं मांगेंगे। आज की रैली से तीसरे फ्रंट का शंखनाद हो चुका है। 2027 के विधानसभा चुनावों में ओबीसी संघर्ष समिति अपने प्रत्याशी उतारेगी। जब हमारा अपना प्रतिनिधि विधानसभा में होगा, तभी हमारे हक सुरक्षित होंगे। -सुदर्शन अंगारिया, अध्यक्ष, घृत्त बाहती चाहंग महासभा (धर्मशाला ब्लॉक)
शांता कुमार ने हमेशा किया ओबीसी का विरोध
यूजीसी के नियम सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बने हैं, केंद्र ने नहीं बनाए। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही हमारे वर्गों के हितों के साथ खिलवाड़ किया है। पूर्व सीएम शांता कुमार ने हमेशा मंडल कमीशन और 27 फीसदी आरक्षण का विरोध करने वाली याचिकाओं का साथ दिया। अब युवाओं का धैर्य जवाब दे चुका है। -सौरभ कौंडल, अध्यक्ष, ओबीसी संघर्ष समिति
यह काल्पनिक विरोध बंद करे सामान्य वर्ग
यह रैली एससी, एसटी और ओबीसी की अटूट एकता का प्रमाण है। हमने यूजीसी नियमों में बदलाव की कभी मांग नहीं की, फिर भी सामान्य वर्ग इसका काल्पनिक विरोध कर रहा है। हम सर्वोच्च न्यायालय तक यह संदेश पहुंचाना चाहते हैं कि इन नियमों को छात्र हित में तुरंत लागू किया जाए। -रवि कुमार दलित, नेता, आरक्षित वर्ग एकता