नूरपुर/पालमपुर (कांगड़ा)। जिला कांगड़ा में मौसम के अचानक बदले मिजाज ने कृषि और बागवानी क्षेत्र के लिए राहत के साथ आफत की स्थिति पैदा कर दी है। लंबे समय से सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे किसानों के लिए रविवार को शुरू हुई बारिश राहत बनकर आई, लेकिन रात के समय आए तेज अंधड़ और तूफान ने फसलों को भारी नुकसान भी पहुंचाया है।
जिला के मैदानी और चंगर क्षेत्रों में लंबे समय से बारिश न होने के कारण मिट्टी की नमी पूरी तरह खत्म हो गई थी। इसके चलते गेहूं की फसल की बढ़वार (ग्रोथ) रुक गई थी और सरसों, जौ व चना जैसी फसलें सूखने की कगार पर थीं। रविवार रात हुई बारिश ने इन फसलों के लिए संजीवनी का काम किया है।
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग, डॉ. कुलदीप धीमान के अनुसार इस बारिश से खेतों में नमी लौटेगी। इससे दानों का आकार बढ़ेगा और उत्पादन में सुधार होगा। विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां सिंचाई की सुविधा नहीं है, वहां फसल में फिर से हरियाली लौट आई है। राहत की यह बारिश उस समय आफत में बदल गई जब इसके साथ तेज हवाएं और अंधड़ शुरू हो गया। नूरपुर, इंदौरा और आसपास के क्षेत्रों में तेज आंधी के कारण तैयार होने की ओर अग्रसर गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है। फसल के गिरने से दानों के विकास पर बुरा असर पड़ता है और कटाई में भी मुश्किल आती है।
बागवानी पर मौसम की मार
बारिश का सबसे नकारात्मक असर फलदार पौधों पर देखने को मिला है। इस समय आम, पलम, आडू और खुमानी के पेड़ों पर फ्लावरिंग (बौर आना) का चरम समय है। रविवार रात आए तूफान के कारण फलदार पौधों की कोमल टहनियां टूट गई हैं और फूलों का एक बड़ा हिस्सा झड़ गया है। नूरपुर क्षेत्र के बागवानों मुकेश शर्मा, सूरम सिंह, सुभाष सिंह और विक्रम जंबाल सहित अन्य का कहना है कि सूखे के कारण पहले ही नए पौधे सूख रहे थे, अब आंधी ने रही-सही कसर पूरी कर दी है। हालांकि बारिश से नमी मिली है, लेकिन फलों की बेहतर सेटिंग के लिए शांत बारिश की जरूरत थी, न कि आंधी-तूफान की।
सोमवार को हुई बारिश गेहूं के अलावा अन्य रबी फसलों के लिए भी बहुत अच्छी है। चंगर क्षेत्रों में जहां नमी की भारी कमी थी, वहां इस बारिश से फसल को नया जीवन मिला है। खेतों में आई हरियाली किसानों के लिए शुभ संकेत है। -डॉ. कुलदीप धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग।
इंदौरा में बारिश के कारण खेत में बिछी गेंहू की फसल। संवाद