नाबालिग लड़की पर शादी का दबाव बनाने के साथ उसे घर से भगाकर बलात्कार करने के आरोपी पर आरोप सिद्ध न होने के चलते अदालत ने बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों के बयानों एवं दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) शरद कुमार लगवाल की अदालत ने फैसला सुनाया। बचाव पक्ष की ओर से केस की पैरवी अधिवक्ता सुधीर संबयाल ने की।
अधिवक्ता सुधीर संबयाल ने बताया कि पठियार निवासी राकेश चंद पर निकटवर्ती क्षेत्र की एक युवती को घर से भगाकर उस पर शादी का दबाव बनाने के साथ बलात्कार करने का आरोप था। युवती के पिता की शिकायत पर पुलिस स्टेशन नगरोटा बगवां में राकेश के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366, 376 के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में राकेश पर आरोप लगाया था कि वह उसकी बेटी को झूठ बोलकर अलग-अलग जगह ले गया।
साथ ही उसके साथ बलात्कार किया। धर्मशाला स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) की अदालत में चली मामले की सुनवाई में 13 गवाहों के बयानों और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायाधीश शरद कुमार लगवाल ने आरोप सिद्ध न होने के चलते राकेश चंद को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।