पालमपुर (कांगड़ा)। प्रदेश राजपूत महासभा ने राजस्थान के निकाय चुनाव परिणाम में बड़ी संख्या में निर्दलीयों की जीत को सियासी दलों के लिए चेतावनी करार दिया है। महासभा का कहना है कि परिणामों को केवल स्थानीय निकाय चुनाव का सामान्य परिणाम मान लेना उचित नहीं होगा। यह सामान्य वर्ग एवं सवर्ण समाज में बढ़ती राजनीतिक असंतुष्टि और नया विकल्प तलाशने का सीधा संकेत है।
महासभा के प्रदेश अध्यक्ष केएस जम्वाल, मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डीवीएस राणा और विजय चंदेल ने संयुक्त बयान में कहा कि राजस्थान के निकाय चुनावों का सबसे बड़ा संदेश यही है कि लोकतंत्र में कोई भी मतदाता वर्ग किसी राजनीतिक दल की स्थायी जागीर नहीं है। जनता की अपेक्षाओं की निरंतर उपेक्षा होने पर मतदाता अपना राजनीतिक विकल्प बदल सकता है।
पदाधिकारियों ने राजनीतिक दलों को आगाह किया कि वे समय रहते इस बदलती जनभावना को समझें। राजनीतिक दल मेरिट प्रथम, सामाजिक न्याय के साथ समान अवसर को अपनी नीतियों का मुख्य आधार बनाएं। राजस्थान में यूजीसी रेगुलेशन, आरक्षण नीति तथा सामान्य वर्ग के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर जो असंतोष सामने आया और उसके बीच निर्दलीय प्रत्याशियों को सफलता मिली, वह राजनीतिक दलों के लिए आत्ममंथन का विषय है।