टांडा मेडिकल कॉलेज की डिस्पेंसरी में स्टाफ की कमी ने बढ़ाई परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मशाला। आधे हिमाचल के स्वास्थ्य का जिम्मा संभालने वाले टांडा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में मरीजों और तीमारदाराें को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां ओपीडी में जांच के बाद मरीजों को सरकारी डिस्पेंसरी के बाहर खड़े रहकर घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। मात्र एक दवा काउंटर के सहारे टांडा में मरीजों को दवाइयों का वितरण हो रहा है। इससे यहां रोजाना लंबी लाइनों से मरीज परेशान हो रहे हैं।
इस बीच कई मरीज अपनी बारी का इंतजार करते थक-हार जमीन पर बैठने को मजबूर हो रहे हैं। बुजुर्ग सहित गर्भवती महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
मेडिकल कॉलेज में पहले ही चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को उपचार के लिए परेशान होना पड़ रहा है। इसके बाद मरीजों के लिए डिस्पेंसरी में मुफ्त दवाइयां लेना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। यहां फार्मासिस्टों की कमी के कारण मरीजों का मर्ज बढ़ रहा है।
रोजाना मेडिकल कॉलेज में दो हजार से अधिक की ओपीडी होती है। कई बार तो भीड़ में मरीजों और फार्मासिस्ट के बीच बहसबाजी हो जाती है।
- टांडा मेडिकल कॉलेज में रोजाना दो हजार से अधिक मरीज अपने उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। अस्पताल में स्टाफ की कमी के कारण परेशानी हो रही है। अगर सरकार स्टाफ भरने को मंजूरी देती है तो नए काउंटर लगाने के बारे में प्रयास किए जा सकते हैं।
- डॉ. अशोक वर्मा, एमएस, टांडा अस्पताल