डरोह (कांगड़ा)। हिमाचल पुलिस में अब पुलिस अनुसंधान विकास ब्यूरो नई दिल्ली के दिशा निर्देशों और उन्हीं के पाठ्यक्रम के आधार पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण को प्राप्त करने वाले जवान खास अंदाज में नजर आएंगे। इनको अर्द्धसैनिक बल की तर्ज पर ट्रेनिंग दी जा रही है।
पीटीसी के एसपी राजेश धर्माणी ने बताया कि पुलिस प्रशिक्षण केंद्र डरोह में इन दिनों पुलिस विभाग का बेसिक ट्रेनिंग कोर्स चल रहा है। सभी पुलिस जवानों को यह प्रशिक्षण बीपीआरएंडडी के दिशा-निर्देशों के तहत करवाया जा रहा है। पीटीसी में 544 पुरुष जवान आरटीसी कोर्स कर रहे हैं और 186 महिलाओं को धर्मशाला सकोह में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सभी जवान प्रदेश पुलिस विभाग की अलग अलग वाहनियों और जिलों से हैं। हालांकि यह पहला मौका नहीं है कि पुलिस के जवानों को ऐसा प्रशिक्षण दिया जा रहा हो।
इससे पहले भी विभाग के प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चौथी, पांचवीं और छठी वाहिनियों के कई जवान इस तर्ज पर प्रशिक्षण ले चुके हैं। पुलिस अनुसंधान विकास ब्यूरो नई दिल्ली के अनुसार देश में पुलिस जवानों और अर्द्धसैनिक बलों में संतुलन बनाने के मकसद से ऐसा प्रशिक्षण जरूरी है। इस प्रशिक्षण में कई अहम पहलुओं पर ज्यादा बल दिया गया है। मैदानी प्रशिक्षण के साथ साथ व्यवहारिक कार्यों पर भी विशेष ध्यान है।
इससे जहां जवान सुडोल और मजबूत बनेंगे वहीं कानून के भी हर पहलू में विशेष ज्ञान हासिल करेंगे। धर्मशाला द्वितीय वाहिनी के कमांडेंट संजीव गांधी ने बताया कि पुलिस अनुसंधान विकास ब्यूरो नई दिल्ली का पाठ्यक्रम बहुत ही बढ़िया है। इससे पुलिस जवानों और अर्धसैनिक बलों के जवानों में समरूपता आएगी। पीटीसी डरोह के एसपी राजेश धर्माणी ने बताया कि 9 माह का बेसिक कोर्स आरटीसी पुलिस जवानों का पहला कोर्स होता है। इसमें वह जितना भी सीखते हैं, वह उन्हें नौकरी के दौरान काम आता है।