धर्मशाला। सिविल अदालत ने साझा जमीन पर निर्माण को लेकर दायर एक वाद में वादी की याचिका खारिज कर दी है। वरिष्ठ सिविल जज देहरा की अदालत ने स्पष्ट किया कि एक सह-स्वामी को केवल इस आधार पर निर्माण करने से नहीं रोका जा सकता कि वह साझा जमीन का उपयोग कर रहा है, जब तक कि उससे अन्य सह-स्वामियों को कोई वास्तविक और अपूरणीय नुकसान साबित न हो जाए।
जानकारी के अनुसार देहरा क्षेत्र के एक व्यक्ति ने दूसरे पक्ष के खिलाफ स्थायी और अनिवार्य निषेधाज्ञा (स्टे) की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। आरोप था कि प्रतिवादी बिना जमीन के बंटवारे के निर्माण सामग्री डालकर मकान बनाने की तैयारी कर रहा है और पेड़ों को काटकर उसके कब्जे में दखल दे रहा है।
प्रतिवादी ने इन सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि उसने वादी के कब्जे में कोई हस्तक्षेप नहीं किया है और यह मुकदमा केवल उसे परेशान करने के उद्देश्य से दायर किया गया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि विवादित जमीन अभी भी सह-स्वामित्व में है और राजस्व रिकॉर्ड में इसका औपचारिक बंटवारा नहीं हुआ है। कानूनन सह-स्वामी को अपनी जमीन के उपयोग का अधिकार होता है और केवल निर्माण की तैयारी करने मात्र से दूसरे सह-स्वामी को उसे रोकने का कानूनी हक नहीं बनता।
वादी अदालत में यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि इस निर्माण से जमीन की उपयोगिता या उसके मूल्य में कोई कमी आएगी। गवाहों के बयानों में विरोधाभास के कारण अदालत ने वादी के पक्ष को कमजोर माना और मुकदमे को निरस्त कर दिया। संवाद