धर्मशाला के उपायुक्त कार्यालय के सभागर में दुग्ध सहकारी समितियों के गठन और विस्तार को लेकर आयोज
धर्मशाला। सभी दुग्ध सहकारी समितियों को दुग्ध उत्पादक संघ (एचपीएमएफ) से जोड़ा जाएगा। इससे दूध के संग्रहण और वितरण की व्यवस्था अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सकेगी। इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) का तकनीकी और प्रबंधन सहयोग भी लिया जा रहा है। एनडीडीबी के सहयोग से गांव-गांव में डेयरी विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। यह बात समितियों के गठन और उनके विस्तार को लेकर मंगलवार को आयोजित बैठक में अध्यक्षता करते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार धर्मशाला राकेश कुमार ने की। इसमें पशुपालकों की आय बढ़ाने, उन्हें संगठित मंच प्रदान करने और डेयरी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर विशेष जोर दिया गया।
इस दौरान चार जिलों के विभिन्न एआर वृत्तों से कुल 308 दुग्ध सहकारी समितियों ने भाग लिया। इनमें चंबा, नूरपुर, धर्मशाला, ऊना, पालमपुर, देहरा और हमीरपुर क्षेत्रों की समितियां शामिल रहीं। कई सहकारी सभाओं ने प्रस्तावित सहकारी संघ की सदस्यता के लिए आवेदन भी किया। प्रत्येक सहकारी सभा ने पांच हजार रुपये शेयर राशि और 100 रुपये प्रवेश शुल्क के रूप में जमा करवाए।
प्रत्येक एआर वृत्त से एक-एक प्रस्तावित निदेशक का चयन किया गया है जो सहकारी संघ के पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरा करेंगे। चार माह बाद पुनः चुनाव कर स्थायी कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा। फिलहाल एक प्रस्तावित कमेटी बनाई गई है जो प्रारंभिक कार्यों को देखेगी।
राकेश कुमार ने कहा कि कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चंबा जिलों में नई दुग्ध सहकारी समितियों के गठन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए सरकार की ओर से लगभग 275 करोड़ रुपये की विभिन्न योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं।
धर्मशाला के उपायुक्त कार्यालय के सभागर में दुग्ध सहकारी समितियों के गठन और विस्तार को लेकर आयोज