धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला ने पिछले साल रोजगार के नाम पर गरीबों से जो दिहाड़ी लगवाई, उसके भुगतान के लिए दिहाड़ीदारों से अब तक नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगवाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, नगर निगम कार्यालय के इस रवैये के कारण अब दिहाड़ीदारों ने अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि रोजगार के नाम पर हमसे दिहाड़ी तो लगवा ली गई, लेकिन बहुत से लोगों को भुगतान के वक्त भीख मांगने पर मजबूर कर दिया गया है। इन्होंने यहां तक कहा कि इन अधिकारियों का मासिक वेतन खाते में आने में दो दिन की देेरी हो जाए तो इन्हें दिक्कत हो जाती है। हमारी बार छह महीनों से मेहनत-मजदूरी के पैसे लटकाए हुए हैं। शहरी क्षेत्रों के जरूरतमंद लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए मुख्यमंत्री शहरी आजीविका गारंटी योजना आरंभ की गई है। वार्ड नंबर नौ की कृष्णा, रुबेश, रेखा और सोनिका ने बताया कि उन्होंने दिसंबर महीने से दिहाड़ी लगाई है लेकिन कोरोना महामारी के मंदी भरे दौर में भी उनकी मेहमत-मजदूरी की कमाई नहीं दी जा रही है। अब तो बार-बार नगर निगम कार्यालय के चक्कर काटकर थक चुके हैं। सोनिका देवी बताती हैं कि उन्होंने जरूरत के वक्त में दिसंबर महीने से लेकर मार्च महीने तक काम किया था। उसके बदले में अब तक 4675 रुपये ही मिले हैं। बाकी के भुगतान के लिए बार-बार दफ्तर के चक्कर लगवाए जा रहे हैं। बैंक में बकाया देखते-देखते अब थक चुके हैं, लेकिन अब तक खातों में पैसे नहीं डाले गए हैं। अब तो नगर निगम कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी ठीक ढंग से बात भी नहीं कर रहे। कोरोना काल में घर का खर्च चलाना वैसे ही बड़ा मुश्किल हो गया था। ऊपर से कमाए हुए पैसे भी नहीं मिलने से मुश्किलें और बढ़ी हैं। उन्होंने बताया कि अगर हमारे साथ इस तरह का ही सुलूक करना था तो हमें नगर निगम क्षेत्र में जोड़ा ही क्यों गया। उन्होंने नगर निगम कार्यालय से जल्द उनके खाते में पैसे डालने की गुहार लगाई है।
गलत रिकॉर्ड जमा करवाने से आई दिक्कत: आयुक्त
नगर निगम धर्मशाला के आयुक्त प्रदीप ठाकुर ने बताया कि उनके पास ऐसी कुछ शिकायतें आई हैं। दरअसल यह दिक्कत दिहाड़ीदार व्यक्ति के गलत रिकॉर्ड जमा करवाने के कारण आई है। उनकी दिहाड़ी का भुगतान समय पर कर दिया गया था, लेकिन बैंक संबंधी जो दस्तावेज या जानकारी दी गई थी, कई मामलों में वह दिहाड़ीदार के आधार कार्ड से नहीं मिल रही थी। इसी वजह से यह समस्या पैदा हुई। उन्होंने बताया कि नगर निगम कार्यालय की तरफ से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि जल्द फंसी हुई भुगतान राशि दिहाड़ीदार के खाते में डलवा दी जाए।
मनरेगा की तर्ज पर शुरू की गई थी मुख्यमंत्री शहरी आजीविका गारंटी योजना
शहरी क्षेत्रों के जरूरतमंद लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए मुख्यमंत्री शहरी आजीविका गारंटी योजना आरंभ की गई है। शहरी निकाय क्षेत्र में मनरेगा की तर्ज पर रोजगार देने के वाला हिमाचल पहला राज्य है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली मनरेगा कि तर्ज पर शहरी निकाय क्षेत्र में भी रह रहे लोगों को रोजगार की गारंटी दी जा रही है। इसमें शहरी निकाय में रहने वाले पात्र व्यक्ति को न्यूनतम 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी का प्रावधान किया गया है।