धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने लंबित मांगों और वित्तीय देनदारियों को लेकर प्रदेश सरकार को दो टूक चेतावनी दी है। समिति ने स्पष्ट कहा है कि सरकार 15 दिन के भीतर उनके प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाए, अन्यथा मंत्रियों, विधायकों और सचिवालय का घेराव किया जाएगा। आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए संघर्ष समिति ने 18 सितंबर को बिलासपुर में प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाई है।
समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर ने कहा कि सरकार की ओर से लगातार अनदेखी की जा रही है और बार-बार आग्रह के बावजूद बातचीत के लिए समय नहीं दिया जा रहा। 18 सितंबर को बिलासपुर में होने वाली बैठक में सभी 12 जिलों के अध्यक्ष व महासचिव सहित 18 संबद्ध संगठनों के शीर्ष पदाधिकारी भाग लेंगे। इस दौरान प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर पर क्रमिक व अनिश्चितकालीन धरने की रूपरेखा तय की जाएगी।
साथ ही स्वेच्छा से आमरण अनशन के लिए तैयार पेंशनरों की सूची भी तैयार की जाएगी। संघर्ष समिति की प्रमुख मांगों में 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान व पेंशन के बकाया एरियर का भुगतान शामिल है। इसमें ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण और कम्यूटेशन की राशि का निपटारा भी लंबित है। इसके अलावा 15 प्रतिशत महंगाई राहत और लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों के तुरंत भुगतान की मांग की जा रही है।
समिति एचआरटीसी पेंशनरों को नियमित पेंशन के साथ तीन फीसदी महंगाई राहत और 50 हजार रुपये एरियर की पहली किस्त देने, शहरी स्थानीय निकायों के पूर्व कर्मियों को संशोधित वेतनमान के तहत पेंशन लाभ देने तथा बिजली बोर्ड कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग पर भी अड़ी है। साथ ही कॉरपोरेट क्षेत्र में 2004 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन सुविधा देने के लिए 1999 की अधिसूचना बहाल करने की मांग उठाई गई है।