कांगड़ा। प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान टांडा मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्था का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि अस्पताल में माैजूदा समय में एक ही एक्सरे मशीन है। यह मशीन एक माह के बाद खराब हाे जाती है। इससे टांडा में आने वाले मरीजों काे परेशानी होती है। टांडा अस्पताल प्रशासन इसका कोई स्थायी हल नहीं निकाल रहा है। पिछले दाे दिन से एक्सरे मशीन के साथ-साथ एक पोर्टेबल मशीन भी खराब पड़ी हुई है।
टांडा मेडिकल कालेज में प्रदेश के छह जिलाें के लाेग अपने उपचार के लिए निर्भर रहते हैं लेकिन यहां पर कई सुविधाओं के न हाेने के कारण लाेगाें काे निजी अस्पतालों में लुटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे लाेगाें के पैसे और समय की बर्बादी हो रही है। कुछ दिन पहले तो टांडा मेडिकल कॉलेज की सभी एक्स-रे मशीनें खराब हो गई थीं, जिससे मरीज परेशान हुए थे। अब टांडा में एक मात्र एक्सरे मशीन है, वह भी बार-बार खराब हाे रही है, जिससे मरीजों काे दिक्कताें का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में पहुंचे मरीजों संजय कुमार, अश्वनी, अशाेक कुमार, कांता देवी और रजनी का आदि कहना है कि मंगलवार काे सुबह साढ़े 11 बजे तक टांडा में एक्सरे नहीं हाे रहे थे। लाेगाें ने टांडा अस्पताल प्रशासन से अपील की है कि टांडा में एक्सरे की अतिरिक्त मशीनें लगाई जाएं, जिससे यहां पर आने वाले लाेगाें काे परेशानी का सामना न करना पड़े।
पिछले दाे शनिवार और साेमवार काे टांडा में एक्सरे मशीन खराब हाेने के कारण मरीजाें के एक्सरे नहीं हाे पाए। साेमवार काे इंजीनियर काे बुलाया गया था। मंगलवार काे लगभग साढ़े 12 बजे के बाद एक्सरे फिर से शुरू हाे गए थे। - प्रीति कपिला, रेडियाेलॉजिट, प्रमुख, टांडा मेडिकल कॉलेज।