हिमाचल प्रदेश में जिला पुनर्गठन आयोग के गठन के बाद पालमपुर को जिला बनाने की वर्षों पुरानी मांग फिर जोर पकड़ने लगी है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल में शुरू हुई यह मुहिम अब तक पूरी नहीं हो पाई है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस बार उनकी मांग पर गंभीरता से विचार होगा और जिला बनने से दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को प्रशासनिक राहत मिलेगी।
हिमाचल प्रदेश में जिला पुनर्गठन आयोग के गठन के बाद पालमपुर को नया जिला बनाने की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर चर्चा में आ गई है। चार सदस्यीय आयोग के गठन से क्षेत्र के लोगों को उम्मीद जगी है कि लंबे समय से अधूरी पड़ी मांग इस बार आगे बढ़ सकती है।
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पालमपुर को जिला बनाने की कवायद पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के कार्यकाल में शुरू हुई थी। उस समय यहां अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) का कार्यालय भी खोला गया था, लेकिन राजनीतिक कारणों से जिला बनाने की पहल सिरे नहीं चढ़ पाई। बाद में एएसपी कार्यालय भी बंद कर दिया गया।
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इसके बाद पालमपुर जिला बनाओ संघर्ष समिति का गठन कर लोगों ने लगातार मांग उठाई। हालांकि, लंबे समय तक मांग पर ठोस निर्णय नहीं होने के कारण यह मुहिम धीरे-धीरे कमजोर पड़ गई। अब जिला पुनर्गठन आयोग के गठन से एक बार फिर उम्मीदें बढ़ी हैं।
धर्मशाला की दूरी से मिलेगी राहत
पालमपुर में एसडीएम कार्यालय, कृषि विश्वविद्यालय, सैनिक स्कूल, बड़े शिक्षण संस्थान और अस्पताल जैसी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं। इसके बावजूद क्षेत्र के कई दूरदराज गांवों के लोगों को जिला मुख्यालय धर्मशाला पहुंचने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ता है।
छोटा भंगाल, चढियार और आलमपुर सहित कई क्षेत्रों से धर्मशाला की दूरी लगभग 80 से 100 किलोमीटर तक बताई जाती है। ऐसे में पालमपुर को जिला बनाने से बैजनाथ, पालमपुर, सुलह और जयसिंहपुर विधानसभा क्षेत्रों के लोगों को प्रशासनिक कामकाज में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
विधायक आशीष बुटेल का बढ़ सकता है सियासी कद
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल की ओर से भी क्षेत्र को जिला बनाने की बात कही गई थी। अब आयोग के गठन के बाद इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मौजूदा सरकार पालमपुर को जिला बनाने का फैसला करती है तो विधायक आशीष बुटेल का राजनीतिक कद बढ़ सकता है। हालांकि, जिला बनाने को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और आगे की प्रक्रिया आयोग की सिफारिशों तथा सरकार के फैसले पर निर्भर करेगी।
क्या कहते हैं क्षेत्र के लोग?
पालमपुर को जल्द जिला बनाया जाए — जगमेल कटोच
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं जिला बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष जगमेल कटोच का कहना है कि पालमपुर को जिला बनाने की शुरुआत पूर्व भाजपा सरकार के समय हुई थी और यहां एएसपी कार्यालय भी खोला गया था, लेकिन मांग पूरी नहीं हो सकी। उनके अनुसार, जनता की सुविधा को देखते हुए पालमपुर को जिला बनाने का फैसला उचित होगा।
आयोग के गठन से उम्मीद बढ़ी — राधा सूद
नगर निगम पालमपुर की महापौर राधा सूद के अनुसार, विधानसभा चुनाव के दौरान विधायक आशीष बुटेल ने भी पालमपुर को जिला बनाने की बात कही थी। अब प्रदेश सरकार की ओर से जिला पुनर्गठन आयोग गठित किए जाने से उम्मीद बढ़ी है कि इस मांग पर सकारात्मक निर्णय हो सकता है।
तथ्य आधारित प्रयास जरूरी — प्रो. अशोक सरियाल
कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के पूर्व कुलपति प्रो. अशोक सरियाल का कहना है कि पालमपुर को जिला बनाने के लिए राजनीतिक नेताओं के साथ संस्थाओं, संगठनों और प्रबुद्ध नागरिकों को भी तथ्य आधारित प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र को जिला बनाने के पक्ष में ठोस तथ्य आयोग के सामने रखना महत्वपूर्ण होगा।
अब आयोग की सिफारिशों पर टिकी निगाहें
पालमपुर को जिला बनाने की मांग के पीछे प्रशासनिक सुविधा, धर्मशाला से दूरी और क्षेत्र के विकास जैसे प्रमुख तर्क दिए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जिला पुनर्गठन आयोग इन पहलुओं पर विचार करेगा। फिलहाल पालमपुर को नया जिला बनाने की कोई अंतिम सरकारी घोषणा नहीं हुई है।