धर्मशाला। प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े अस्पताल टांडा मेडिकल कॉलेज में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की भारी किल्लत है। इस कमी से मरीज और तीमारदार लगातार परेशान हो रहे हैं। आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल लाते ही तीमारदार उपकरणों के लिए भटकने लगते हैं।
अस्पताल में वर्तमान समय में 100 से अधिक स्ट्रेचर और व्हीलचेयर मौजूद हैं। इसके बावजूद जरूरत पड़ने पर मौके पर एक भी उपकरण नहीं मिलता।
इमरजेंसी के बाहर स्टैंड पूरी तरह खाली रहता है। अस्पताल के विभिन्न वार्डों में तीमारदार उपकरणों को लावारिस छोड़ जाते हैं। इन्हें एकत्रित करने के लिए अस्पताल प्रशासन की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।
अमित कुमार, राम स्वरूप, अरविंद कुमार, रमेश कुमार और अश्वनी कुमार ने गंभीर आरोप लगाए। सरोज कुमारी, कांता देवी, रजनी, किरण कुमारी और रमता ने भी रोष व्यक्त किया। तीमारदारों ने कहा कि गंभीर मरीज को तुरंत इलाज की जरूरत होती है। उपकरण ढूंढने में समय बर्बाद होने से मरीज का संकट बढ़ जाता है। इमरजेंसी के बाहर उपलब्ध उपकरण खुद खस्ताहाल हैं।
पहिए खराब होने की वजह से इन्हें खींचकर घसीटना पड़ता है। इससे तीमारदारों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके अलावा परिजनों ने ऑपरेशन थियेटर के बाहर बैठने के लिए बेंच कम होने का मुद्दा भी उठाया।
क्या कहते हैं सुरक्षाकर्मी
सुरक्षाकर्मियों के मुताबिक कई तीमारदार इस्तेमाल के बाद स्ट्रेचर और व्हीलचेयर को तय स्थान पर वापस नहीं छोड़ते। कई उपकरण ऑपरेशन थियेटर के बाहर यूं ही खाली पड़े रहते हैं। इस अव्यवस्था को रोकने के लिए 100 रुपये सिक्योरिटी राशि ली जा रही है। इसका मकसद तीमारदारों की ओर से पैसे वापस लेने के बहाने उपकरण तय जगह पर छोड़ना है।
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मौजूदा समय में टांडा अस्पताल में 100 से अधिक स्ट्रेचर और व्हीलचेयर मौजूद हैं। कई लोग इस्तेमाल के बाद इन्हें जहां मन करता है, वहीं छोड़ देते हैं। इधर-उधर पड़े उपकरणों को आपातकालीन विभाग तक पहुंचाने के लिए कर्मी तैनात किया गया है। तीमारदारों से 100 रुपये सिक्योरिटी राशि ली जा रही है ताकि वे पैसे वापस लेने आएं और उपकरण सही जगह पहुंचाएं। -विवेक बन्याल, चिकित्सा अधीक्षक, टांडा अस्पताल