धर्मशाला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, धर्मशाला ने इलेक्ट्रिक स्कूटर की डिलीवरी में देरी करने पर ओला इलेक्ट्रिक कंपनी और उसके पंजीकृत स्टोर संचालक के विरुद्ध बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को स्कूटर की मूल राशि और बीमा प्रीमियम के मद में जमा 1,54,727 रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए।
इसके अतिरिक्त मानसिक प्रताड़ना के लिए 25 हजार रुपये मुआवजा और कानूनी खर्च के रूप में 10 हजार रुपये का भुगतान करने के भी निर्देश दिए गए हैं। आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य नारायण ठाकुर और आरती सूद की पीठ ने तथ्यों की जांच के बाद यह आदेश जारी किया।मामले के अनुसार तहसील शाहपुर के धनोटू निवासी आयुष अवस्थी ने ओला इलेक्ट्रिक के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्कूटर बुक किया था।
10 अगस्त 2025 को कंपनी ने वाहन फैक्ट्री से निकलने का संदेश भेजकर शीघ्र डिलीवरी का आश्वासन दिया। इस पर शिकायतकर्ता ने 1,43,871 रुपये का पूर्ण भुगतान कर दिया। साथ ही 10,856 रुपये का बीमा प्रीमियम भी जमा करवा दिया। कंपनी ने 23 अगस्त 2025 तक डिलीवरी का वादा किया था, लेकिन निर्धारित तिथि बीत जाने के बाद भी वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया।
बार-बार संपर्क करने पर भी कंपनी ने न तो डिलीवरी की कोई नई तारीख बताई और न ही देरी का कोई संतोषजनक कारण दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने एक अक्तूबर 2025 को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन कंपनी की ओर से उसका भी कोई उत्तर नहीं मिला। आयोग ने सेवा में इस गंभीर चूक को देखते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। साथ ही वाहन की बीमा पॉलिसी को तत्काल प्रभाव से रद्द करने और 45 दिनों के भीतर आदेश का अनुपालन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।