स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा को मांग पत्र सौंपती शिक्षा बोर्ड पेंशनर वेल्फेय
स्कूलों को सीबीएसई बोर्ड के हवाले करने का विरोध
प्रदेश शिक्षा बोर्ड पेंशनर वेल्फेयर एसोसिएशन ने जताई आपत्ति
स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा को सौंपा ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। प्रदेश सरकार ने सूबे के 100 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई बोर्ड के अधीन करने की प्रतिक्रिया शुरू कर दी है। इसका प्रदेश शिक्षा बोर्ड पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन ने विरोध किया है। शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा को ज्ञापन सौंपकर एसोसिएशन ने सरकार से इस फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी और कुलदीप वालिया ने संयुक्त बयान में कहा कि सरकार के इस कदम से बोर्ड के 350 कर्मचारियों और 450 पेंशनरों पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा बोर्ड अभी तक अपने सीमित संशाधनों द्वारा आत्मनिर्भरता से कार्य चला रहा है। उन्होंने कहा कि बोर्ड की ओर से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में भेजी गई पुस्तकों का करीब 87.50 करोड़ रुपये सरकार से लेने को है, इससे बोर्ड का संपूर्ण कार्य एवं देनदारियां रुक गई हैं।
उन्होंने कहा कि बोर्ड में मौजूदा समय में कार्य ऑनलाइन हो रहे हैं, लेकिन फिर भी कुछ कार्यों को करवाने के लिए उन्हें बोर्ड मुख्यालय आना पड़ता है। सीबीएसई से मान्यता मिलने के बाद उन्हें वहां के चक्कर काटने होंगे, जिससे अनावश्यक वित्तीय बोझ बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार जिन अच्छे साधन संपन्न 100 स्कूलों की सूची सीबीएसई बोर्ड को सौंपने जा रही है, उनमें भी सरकार की ओर से अवलोकन के बाद 15-20 स्कूलों को सीबीएसई बोर्ड के मानदंड के अनुरूप नहीं पाया गया है। सीबीएसई बोर्ड जब इन स्कूलों का निरीक्षण करेगा, तो कई स्कूल बाहर हो जाएंगे। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि सीबीएसई बोर्ड को शुरू करने से पहले एक बार फिर से विचार किया जाए।