लगातार बढ़ रही मांग, कांगड़ा में 450 हैक्टेयर भूमि पर होता है छह हजार मीट्रिक टन आलू का उत्पादनआलू दिवस पर विशेष...
आलू की फसल से हर साल लाखों की कमाई कर रहे दुर्गम क्षेत्र छोटा भंगाल के किसान
सचिन चौधरी/विजय सूद
धर्मशाला/मुल्थान (कांगड़ा)। प्रदेश के कुफरी ज्योति आलू के हिमाचल के साथ पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली के लोग भी मुरीद हैं। खाने में उपयुक्त और स्वाद में लाजवाब यह आलू बाहरी राज्यों के लोगों को भी काफी पसंद आ रहा है। हिमाचल के साथ-साथ धीरे-धीरे कुफरी ज्योति आलू की डिमांड आसपास के राज्यों से भी आ रही है। बड़े किसान अपनी आलू की फसल को लोकल मंडियों में देने की बजाय बाहरी राज्यों की मंडी में भेज कर अधिक मुनाफा कमा रहे हैं।
बात करें प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा की तो यहां लगभग 450 हैक्टेयर भूमि पर आलू की फसल लगाई जाती है। हर साल आलू का उत्पादन करीब 5,810 मीट्रिक टन उत्पादन होता है। इससे किसान हर साल मालामाल हो रहे हैं। करीब पांच से आठ साल में किसानों को आलू के सही दाम मिलना शुरू हुए हैं। अब किसान अपनी फसल को 30 से 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेच रहे हैं। वहीं, जिले के छोटे किसान भी ज्यादातर इसी किस्म के आलू की पैदावार कर साल भर खुद तैयार किए आलू ही खाते हैं।
कांगड़ा के बैजनाथ ब्लॉक यानी छोटा भंगाल की मुल्थान और बरोट चौहार घाटी में आलू की सबसे अधिक फसल तैयार की जाती है। वहां के किसान अधिकतर आलू की फसल पर ही निर्भर होते हैं। दुर्गम क्षेत्र के किसान इस पहाड़ी आलू से हर साल लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं। इसके अलावा पालमपुर क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर आलू की खेती की जाती है। छोटा भंगाल की मुल्थान और बरोट चौहार घाटी के किसान आलू की नई फसल से तो अच्छा पैसा कमाते हैं वहीं, दिसंबर माह में आलू का बीज बेचकर भी काफी मुनाफा कमाते हैं। जुलाई से दिसंबर तक वहां आलू की फसल को निकाला जाता है।
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क्या है कुफरी ज्योति आलू
कुफरी ज्योति एक आलू की किस्म है, जो कि हिमाचल प्रदेश में खासकर पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। यह एक मध्य-मौसम वाली किस्म है, जो लगभग 80 से 150 दिनों में पक जाती है। इसे पहाड़ी और मैदानी इलाकों दोनों में उगाया जा सकता है। कुफरी ज्योति आलू का कद बड़ा, अंडाकार और चिकनी त्वचा वाला होता है। यह किस्म पछेता झुलसा रोग रोग प्रतिरोधी है। यह एक उच्च उपज वाली किस्म है, जिसकी पैदावार 150-175 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है।
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- जिला कांगड़ा में करीब 450 हैक्टेयर भूमि पर आलू की फसल लगाई जाती है और इसमें करीब 5,810 मिट्रिक टन का उत्पादन होता है। सबसे अधिक खेती बैजनाथ ब्लॉक में होती है। विभाग की ओर से किसानों को कुफरी ज्योति आलू का बीज मुहैया करवाया जाता है। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में चंद्रमुखी आलू भी लगाया जाता है।
- कुलदीप धीमान, उपनिदेशक, कृषि विभाग कांगड़ा