धर्मशाला। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश-द्वितीय देहरा की अदालत ने जमीन पर सड़क निर्माण और पेड़ काटने से रोकने की मांग को लेकर दायर एक दीवानी वाद खारिज कर दिया है। अदालत ने पाया कि वादी अपने दावे के समर्थन में न तो कोई साक्ष्य पेश कर सका और न ही खुद गवाही के लिए उपस्थित हुआ, जिसके चलते अदालत ने यह फैसला सुनाया।
वादी ने वर्ष 2015 में राज्य सरकार और ग्राम पंचायत सिहोरपाईं के खिलाफ यह मामला दायर किया था। इसमें जजवार स्थित उसकी भूमि पर सड़क निर्माण न करने, पेड़ न काटने और जमीन की प्रकृति से छेड़छाड़ न करने की गुहार लगाई गई थी। साथ ही भूमि से कथित अतिक्रमण हटाकर कब्जा दिलाने की भी मांग की गई थी।
मामले में ग्राम पंचायत ने दलील दी कि संबंधित स्थान पर ग्रामीणों के आवागमन और खेती के लिए पहले से ही रास्ता मौजूद है। वर्ष 1998 में इस पुराने कच्चे रास्ते को पक्का किया गया था। पंचायत ने स्पष्ट किया कि मौके पर नया रास्ता नहीं बनाया जा रहा, बल्कि पुराने की ही मरम्मत की जा रही है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि वादी अपना दावा साबित करने का प्रारंभिक भार पूरा करने में पूरी तरह विफल रहा है। केवल वादपत्र में लगाए गए आरोपों के आधार पर स्थायी निषेधाज्ञा जारी नहीं की जा सकती। ठोस साक्ष्य के अभाव में अदालत ने वादी के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष दर्ज करते हुए वाद खारिज कर दिया।