रक्कड़/परागपुर(कांगड़ा)। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में सत्र 2025-26 से चार वर्षीय शास्त्री और एक वर्षीय आचार्य पाठ्यक्रम की शुरुआत होगी। कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी और बलाहर स्थित वेदव्यास परिसर की निदेशक प्रो. सत्यम कुमारी ने बताया कि यह बदलाव नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत किया गया है।
उन्होंने कहा कि चार वर्षीय शास्त्री में वेद, ज्योतिष, व्याकरण, साहित्य, दर्शन, बौद्ध दर्शन, कश्मीर शैव दर्शन, धर्मशास्त्र, अद्वैत वेदांत, पुराण इतिहास, पालि और प्राकृत जैसे पारंपरिक विषयों के साथ कंप्यूटर, राजनीति विज्ञान, इतिहास, अंग्रेजी, हिंदी और कौशल विकास जैसे आधुनिक विषय भी शामिल होंगे।
वहीं, शास्त्री डिग्री चरणबद्ध तरीके से मिलेगी। उन्होंने कहा कि 2 सेमेस्टर पूरे करने पर सर्टिफिकेट, 4 सेमेस्टर पूरे करने पर डिप्लोमा, छह सेमेस्टर पूरे करने पर शास्त्री (स्नातक) डिग्री और 8 सेमेस्टर पूरे करने पर शास्त्री (शोध प्रतिष्ठा) उपाधि दी जाएगी। इसके अलावा 10 सेमेस्टर पूरे करने पर आचार्य (स्नातकोत्तर) डिग्री, जिससे छात्र शोध के लिए पात्र होंगे।
विश्वविद्यालय की एनईपी पाठ्यक्रम निर्धारण समिति की रिपोर्ट और सुझावों को विश्वविद्यालय सहित आदर्श महाविद्यालयों और सभी संबद्ध महाविद्यालयों में लागू कर दिया गया है।