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Kangra News: हस्तशिल्प से आत्मनिर्भर बन रहीं पहाड़ की महिलाएं

Fri, 29 May 2026 01:12 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
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धर्मशाला। शहर में स्थित कांगड़ा कला संग्रहालय इन दिनों केवल कला प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र नहीं बल्कि महिला सशक्तीकरण की नई मिसाल बनकर उभर रहा है। यहां स्थानीय महिला कलाकारों की ओर से तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रदर्शित किया जा रहा है, जिससे महिलाओं को अतिरिक्त आय के साथ नई पहचान भी मिल रही है।
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संग्रहालय में पांच वर्षों से स्थानीय कलाकारों के छोटे-बड़े कलात्मक उत्पाद रखे जा रहे हैं। इनमें पारंपरिक कांगड़ा कला, सजावटी वस्तुएं, हस्तशिल्प सामग्री और घरेलू उपयोग के आकर्षक उत्पाद शामिल हैं। मंडी की रंजना की मंडाला कला, योल की शैली की रेंजिन आर्ट और लदवाड़ा की मनीषा की ओर से चीड़ की पत्तियों से तैयार किए गए उत्पाद पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रहे हैं।
छोटे उत्पादों की कीमत तीन हजार रुपये तक है, जबकि विशेष कलात्मक वस्तुएं 20 हजार रुपये तक में बिक रही हैं। इन उत्पादों की बिक्री से महिला कलाकारों को हर महीने लगभग तीन से चार हजार रुपये की अतिरिक्त आय हो रही है। इससे न केवल महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं बल्कि उनकी कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी मिल रही है।
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कांगड़ा कला संग्रहालय की अध्यक्ष रीतु मलकोटिया ने बताया कि पर्यटकों और कला प्रेमियों की बढ़ती रुचि से स्थानीय कलाकारों को लगातार प्रोत्साहन मिल रहा है। महिला कलाकारों की ओर से तैयार किए गए उत्पादों की खरीदारी के माध्यम से पर्यटक स्थानीय संस्कृति से भी जुड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों की कई महिलाएं अब अपनी पारंपरिक कला को रोजगार का माध्यम बना रही हैं, जो कला पहले घरों तक सीमित थी, वही अब संग्रहालय की शोभा बढ़ाने के साथ महिलाओं की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही है। संग्रहालय में इन उत्पादों को स्थान देने का उद्देश्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करना भी है। संवाद
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