धर्मशाला में आशा वर्कर को स्तनपान की जानकारी देतीं नर्सिंग ऑफिसर नम्रता कपूर। -अमर उजाला
धर्मशाला। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने कहा कि नवजात शिशु के लिए मां का दूध ही पहला सुरक्षा कवच और पोषण का सबसे संपूर्ण स्रोत है। जन्म के प्रथम एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने से शिशु को कोलोस्ट्रम (पीला गाढ़ा दूध) प्राप्त होता है, जो पहले टीके की तरह काम कर बच्चे को कई तरह के संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करता है।
यह बात उन्होंने बुधवार को सीएमओ सभागार में आयोजित जिलास्तरीय जागरूकता कार्यशाला में कही। विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत आशा कार्यकर्ताओं, सीएचओ और माताओं के लिए आयोजित इस कार्यशाला में डॉ. राजेश सूद ने वर्ष 2026 की थीम ‘जीवन की सतत एवं स्वस्थ शुरुआत के लिए स्तनपान: जो प्रभावी है, उसे और सशक्त बनाएं’ पर प्रकाश डाला।
स्वास्थ्य शिक्षिका अर्चना गुरंग ने बताया कि शुरुआती छह महीनों तक केवल मां का दूध पिलाने से नवजात मृत्यु दर में कमी आती है और बच्चों का मानसिक विकास बेहतर होता है। यह बच्चे के आजीवन अच्छे स्वास्थ्य की मजबूत नींव रखता है। साथ ही यह माताओं में प्रसवोत्तर रक्तस्राव के जोखिम को भी कम करता है।
अस्पताल की नर्सिंग ऑफिसर नम्रता कपूर ने कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को स्तनपान की सही विधि और सिजेरियन प्रसव के बाद शीघ्र स्तनपान के प्रोटोकॉल पर जानकारी दी। उन्होंने निमोनिया व डायरिया से बचाव के लिए बोतल से दूध न पिलाने की सलाह दी। कार्यशाला के दौरान क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसकी विजेता माताओं प्रिया, पूजा, अमिता और सकीना को सम्मानित भी किया गया।