नगरी (पालमपुर)। कोरोना काल की अनिश्चितता ने जहां कई लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा कर दिया, वहीं चचियां नगरी निवासी अमित ठाकुर के लिए यह आपदा आत्मनिर्भरता का अवसर बन गई। चंडीगढ़ की एक निजी कंपनी में अच्छा वेतन और सुरक्षित नौकरी छोड़कर गांव लौटे अमित ने पशुपालन को आधुनिक तरीके से अपनाया। आज वह महज आठ उन्नत नस्ल की गायों के जरिए डेयरी फार्म संचालित कर तमाम खर्चे काटने के बाद हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं।
मिलाप ठाकुर के पुत्र अमित बताते हैं कि शहर की नौकरी छोड़कर गांव में दूध का कारोबार शुरू करने के फैसले पर शुरुआत में उन्हें परिजनों और ग्रामीणों के ताने भी सुनने पड़े लेकिन उन्होंने इरादे डिगने नहीं दिए। भारी-भरकम कर्ज लेने के बजाय उन्होंने शुरुआत में जर्सी और साहीवाल नस्ल की केवल तीन दुधारू गायें खरीदीं। बेहतर प्रबंधन और वैज्ञानिक देखरेख के दम पर आज उनके फार्म में आठ गायें हैं। इनसे रोजाना करीब 150 से 160 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है।
अमित ने बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय सीधी बिक्री का मॉडल अपनाया। उन्होंने नगरी बाजार और आसपास के ग्रामीण व आवासीय क्षेत्रों में घर-घर शुद्ध दूध की आपूर्ति शुरू की। ग्राहकों का ऐसा भरोसा बना कि अब दूध के लिए एडवांस बुकिंग तक रहती है।
कच्चे दूध के साथ-साथ वह पनीर, दही और शुद्ध देसी घी जैसे मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार कर बाजार में बेचते हैं जिससे मुनाफे में बढ़ोतरी हुई है। चारे की लागत घटाने के लिए वह घर की फसलों और स्थानीय पौष्टिक चारे से खुद संतुलित फीड तैयार करते हैं। अमित का यह सफल मॉडल क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार की एक नई मिसाल पेश कर रहा है।
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डेयरी फार्मिंग की सफलता पशुओं की संख्या पर नहीं, बल्कि उनके वैज्ञानिक प्रबंधन, संतुलित आहार और स्मार्ट मार्केटिंग पर टिकी है। यदि युवा खुद फार्म पर समय दें, पशुओं की सेहत का ध्यान रखें और दूध के साथ उसके उप-उत्पाद तैयार कर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं, तो कम पूंजी और सीमित संसाधनों में भी बेहतरीन मुनाफा कमाया जा सकता है। -अमित ठाकुर, प्रगतिशील पशुपालक, चचियां नगरी
अमित ठाकुर, सफल डेयरी उद्यमी (चचियां नगरी)- फोटो : credit