धर्मशाला। क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला में स्वास्थ्य सेवाएं विशेषज्ञों की कमी के कारण बुरी तरह चरमरा गई हैं। अस्पताल में मेडिसिन विशेषज्ञों की भारी कमी का सीधा खामियाजा इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। वर्तमान में हालत यह है कि मेडिसिन ओपीडी में प्रतिदिन करीब 100 मरीज जांच के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें देखने के लिए पूरे अस्पताल में केवल एक ही मेडिसिन विशेषज्ञ उपलब्ध है।
एक ही चिकित्सक के सहारे व्यवस्था चलने के कारण मरीजों को अपनी बारी के लिए घंटों तक लाइनों में खड़ा रहना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में वायरल बुखार, उच्च रक्तचाप (बीपी), मधुमेह (शुगर), हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। इससे मेडिसिन ओपीडी पर अत्यधिक दबाव पड़ गया है।
हालात ऐसे हैं कि सुबह से ही ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो जाती हैं और कई मरीजों का नंबर तो दोपहर बाद जाकर आता है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बाकायदा एक सुरक्षा कर्मी को ओपीडी के बाहर सेवाएं देनी पड़ रही हैं। विशेषज्ञों की इस कमी का सबसे अधिक खामियाजा इलाज के लिए पहुंचने वाले बुजुर्गों और दूरदराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
पर्ची बनवाने के बाद डॉक्टर से मिलने के लिए लंबा इंतजार करने के कारण उनका पूरा दिन अस्पताल में ही बीत रहा है। मेडिसिन विभाग अस्पताल की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है, क्योंकि ज्यादातर मरीज प्रारंभिक जांच के लिए यहीं आते हैं।
उधर, क्षेत्रीय अस्पताल की एमएस डॉ. अनुराधा शर्मा का कहना है कि ओपीडी में केवल एक विशेषज्ञ होने से भीड़ अधिक रहती है। सरकार से अस्पताल में एक और मेडिसिन विशेषज्ञ की मांग की गई है, ताकि मरीजों को जल्द राहत मिल सके और अकेले चिकित्सक पर भी बोझ कम हो।