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Kangra News: पांच दोस्तों की सोच से जन्मा कांगड़ा सेवियर्स, हजारों की जिंदगी बचाईं

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धर्मशाला। रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। इसी सोच के साथ 26 जून 2016 को पांच दोस्तों ने संस्था की स्थापना की, जिसका नाम कांगड़ा सेवियर्स रखा गया। अभी तक संस्था के सदस्य 35 हजार से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं। आज यह कारवां इतना ज्यादा आगे बढ़ गया है कि मौजूदा समय में संस्था के विभिन्न ग्रुपों में तीन हजार से अधिक सदस्य बन चुके हैं। कांगड़ा सेवियर्स के सदस्य अपने शहर के नाम से व्हाट्सग्रुप ग्रुप बनाकर आसपास के लोगों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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कांगड़ा जिले में इस समय कांगड़ा सेवियर्स, धर्मशाला सेवियर्स, पालमपुर सेवियर्स, नगरोटा सेवियर्स, देहरा सेवियर्स, नगरोटा सूरियां सेवियर्स के नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं, जो जरूरतमंद लोगों को मौके पर खून देने का कार्य कर रहे हैं। किसी को रक्त की जरूरत के संदेश के बाद डोनर सीधे उस अस्पताल में पहुंच जाते हैं। कांगड़ा सेवियर्स की टीम के माध्यम से अन्य जिलों चंबा, हमीरपुर, सोलन और शिमला में भी ग्रुप बनाए गए हैं।
कोरोना काल में सेवियर्स ने कांगड़ा में 800 से अधिक यूनिट रक्तदान करवाया था। इससे पहले प्रदेश में इस ग्रुप के सदस्यों ने 4500 से अधिक यूनिट रक्तदान करवाया था, जो संख्या अब 35 हजार से अधिक पहुुंच गई है। रोजाना संस्था के सक्रिय सदस्य टांडा और धर्मशाला में पांच से 10 यूनिट तक रक्तदान कर रहे हैं। संस्था का मानना है कि शिविर के बजाय अगर मौके पर किसी को खून दिया जाए तो इससे किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है।
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कांगड़ा सेवियर्स के संस्थापक एवं अध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी ने 26 जून 2016 को अपने पांच दोस्तों के साथ मिलकर इसकी स्थापना की थी। इसके बाद से यह ग्रुप निरंतर काम कर रहा है। संस्था की ओर से समय-समय पर शिक्षण संस्थानों में जाकर रक्तदान के प्रति युवाओं को जागरूक करने के लिए गेस्ट लेक्चर भी दिए जा रहे हैं। इसके अलावा वे लोगों की भ्रांतियां भी दूर कर रहे हैं कि खून देने से किसी प्रकार की कमजोरी या अन्य समस्या नहीं होती है। समय-समय पर खून देने के कई लाभ हैं।
मिलता है केवल 10 रुपये का पैकिंग जूस
संस्था की ओर से रोजाना रक्तदान किया जा रहा है, लेकिन सरकार की ओर से रक्तदानियों को केवल 10 रुपये का पैकिंग जूस दी दिया जाता है। सरकार से मांग है कि इस डाइट को बढ़ाकर 50 रुपये तक किया जाए। साथ ही किसी भी कर्मचारी को रक्तदान वाले दिन छुट्टी दी जाए। अभी तक वह खुद 55 बार रक्तदान कर चुके हैं। - वीरेंद्र चौधरी, अध्यक्ष, कांगड़ा सेवियर्स संस्था।

सबसे बड़े जिले में केवल पांच ही ब्लड बैंक हैं, जिन्हें बढ़ाने की जरूरत है। रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। अगर किसी को खून की जरूरत हो तो पहले परिजन रक्तदान के लिए आगे आएं, जिससे किसी प्रकार की परेशानी न हो। अभी तक मैनें 36 बार रक्तदान किया है। लोगों से अपील है कि रक्तदान के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर किया जाए। - तरुण धीमान, उपाध्यक्ष, कांगड़ा सेवियर्स संस्था
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