एक साल में हासिल किया मुकाम
पति की शहादत के बाद कल्पना ने कठिन परिस्थितियों से उबरते हुए एसएससी की तैयारी शुरू की। कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर महज एक साल के भीतर उन्होंने एसएससी परीक्षा में वीर नारी श्रेणी में देशभर में पहला स्थान हासिल कर लिया। कल्पना इससे पहले आर्मी स्कूल में शिक्षिका के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं। अब सैन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वह देशसेवा के क्षेत्र में नई जिम्मेदारी संभालेंगी।
ससुर ने हर कदम पर बढ़ाया हौसला
कल्पना अपनी सफलता का श्रेय अपने दिवंगत पति मेजर अंकित धीमान की प्रेरणा के साथ-साथ अपने ससुर जनवेद कुमार को भी देती हैं। उन्होंने बताया कि कठिन समय में उनके ससुर ने उनका साथ दिया और हर कदम पर हौसला बढ़ाया। कल्पना का कहना है कि वह अपनी इस उपलब्धि के माध्यम से देश की अन्य वीर नारियों को भी आगे बढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं। कल्पना धीमान की यह उपलब्धि व्यक्तिगत साहस, संकल्प और मेहनत की मिसाल है। पति को खोने के बेहद कठिन दौर के बाद उन्होंने खुद को संभाला और देशसेवा के उसी रास्ते को चुना, जिस पर उनके पति चलते थे।