रक्कड़ (कांगड़ा)। न्याटी सुंही के चंबा पत्तन में श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन अतुल कृष्ण ने कहा कि हमें यह विश्वास होना चाहिए कि जिस परमात्मा ने अब तक दिया है, वह आगे भी हमें देता ही रहेगा।
धर्म जीवंत है, धर्म एक उत्सव है। धर्म का आदेश दुख नहीं है, धर्म आनंद का सृजन करता है। धर्म परमानंद की खोज है। परमात्मा अभी है, वह भूतकाल या भविष्य का विषय नहीं है। हमारी आत्मा हीरे जैसी है और संसार का व्यवहार कीचड़ जैसा। कीचड़ के कारण हीरा नहीं फेंका जा सकता।
अतुल कृष्ण ने कहा कि अतीत के विचार, भविष्य की योजनाएं, यही मन है। अतीत अभी है नहीं और भविष्य अभी हुआ नहीं, उसी में हम उलझे रहते हैं। जिसे बीते हुए कल की अथवा आने वाले कल की चिंता नहीं होती, वही अपने जीवन में स्वर्ग का निर्माण कर पता है। कथा में श्रीमद्भागवत का महात्म्य, गोकर्णोपाख्यान, राजा परीक्षित को श्रृंगी ऋषि का श्राप, परीक्षित के प्रश्न, सृष्टि वर्णन एवं भगवान के कपिल अवतार की कथा सभी ने अत्यंत श्रद्धा से सुना।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से मुख्य यजमान गुलशन कुमार, दिनेश ठाकुर, देशबंधु, मानचंद ठाकुर, प्रकाश चंद्र ठाकुर, कुलभूषण ठाकुर, निखिल ठाकुर, किरण ठाकुर आदि उपस्थित रहे। कथा से पूर्व पंचतीर्थी, कालेश्वर तक शोभायात्रा भी निकाली गई।