धर्मशाला। जिला आयुष अस्पताल धर्मशाला में मरीजों का विश्वास दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। लोग एलोपैथी के बजाय आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज करवाना पसंद कर रहे हैं। प्रदेश और केंद्र सरकार भी इस दिशा में लोगों को प्रोत्साहित कर रही है। यह बात शनिवार को जिला आयुष अधिकारी डॉ. गगनदीप और मेडिसन विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि मरीजों को आयुष पद्धति से अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
डाॅ. गगनदीप ने कहा कि धर्मशाला आयुष अस्पताल में पिछले एक माह 84 मरीजों ने पंचकर्मा का लाभ उठाया है। वहीं, पिछले एक माह में अस्पताल की ओपीडी 1,193 के करीब रही है। वहीं, बीते वर्ष अस्पताल की ओपीडी 14,946 के करीब रही और 1,487 मरीजों ने पंचकर्मा का लाभ उठाया। उन्होंने बताया कि जिले में 249 आयुष स्वास्थ्य केंद्र और 153 बेलनेस सेंटर हैं। वेलनेस सेंटर में भी पंचकर्मा की सुविधा प्रदान की जा रही है। मरहम थैरेपी और नाड़ी परीक्षण से भी मरीजों को लाभ पहुंच रहा है। किसानों की आय बढ़ाने और जड़ी बूटियों को उगाने के लिए मिशन धनवंतरी शुरू किया गया है।
ये हैं लाभ
आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार पंचकर्म से कई लाभ मिलते हैं। इसके कई स्वास्थ्य लाभ हैं, जैसे शरीर से टॉक्सिन को खत्म करना, पाचन और मेटाबोलिज्म में सुधार, इम्युनिटी सिस्टम को बढ़ावा देना, सेल्स को फिर से जीवंत करना, मानसिक स्पष्टता को बढ़ावा देना, तनाव को कम करना, वात दोष, संधिवात, कटिशूल, अनिद्रा और चमड़ी रोगों का इलाज आदि।