राजा का तालाब (कांगड़ा)। प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों व कर्मचारियों के वेतन में तीन प्रतिशत कटौती के आदेश को तुरंत वापस लिया जाए। साथ ही प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों की ओर से लंबित बिजली बोर्ड के 495 करोड़ रुपये के बिल तुरंत जमा करवाए जाएं। यदि समय रहते भुगतान नहीं हुआ तो विद्युत प्रबंधन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
यह मांग हिमाचल प्रदेश विद्युत पेंशनर फोरम जवाली की वीरवार को मैरा में आयोजित बैठक में इकाई प्रधान राम लुभाया की अध्यक्षता में उठाई गई। बैठक में फोरम के राज्य उपाध्यक्ष पवन मोहल ने आरोप लगाया कि सरकार और बोर्ड प्रबंधन की विफलताओं के कारण ही बोर्ड को घाटे में दिखाया जा रहा है। सभी राजनीतिक पार्टियां निजी हित और सत्ता की लालसा के लिए मुफ्त में बिजली देने का लालच देती हैं। कर्मचारियों और पेंशनरों को भी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। अगर प्रदेश सरकार ने मुफ्त बिजली प्रदेश की जनता को देनी है तो राशि अपने खजाने में से दे।
बैठक में संयुक्त सचिव सुखदेव धीमान, वरिष्ठ उपप्रधान चैन सिंह पठानिया, उपप्रधान केवल राणा, संगठन सचिव गणेश कुमार और ऑडिटर कृष्ण धीमान सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि पहली जनवरी 2016 से 31 मार्च 2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अब तक संशोधित लीव इनकैशमेंट और ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया गया है। 70 और 75 वर्ष आयु वर्ग के पेंशनरों को भी बकाया राशि नहीं मिली है। ये सभी वित्तीय लाभ शीघ्र दिए जाएं। बिजली बोर्ड में तुरंत स्थायी भर्तियां की जाएं। फोरम ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और प्रबंधन ने इन मांगों को जल्द पूरा नहीं किया, तो पेंशनर फोरम बड़ा आंदोलन करेगा।