बरियाल (कांगड़ा)। पठानकोट-जोगिंदरनगर रेलमार्ग पर रेलगाड़ियां न चलने से स्थानीय जनता में आक्रोश है। लोगों ने 25 जनवरी की समय सीमा के बाद उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। तीन साल से बंद इस महत्वपूर्ण रेल सेवा के बहाल होने के आश्वासन के बावजूद सेवा शुरू नहीं हो पाई है। अगस्त 2022 में चक्की खड्ड रेलवे पुल के टूटने और बारिश-भूस्खलन के कारण सेवा बाधित है। इससे जिला कांगड़ा के लोग परेशान हैं और रेल सेवा की जल्द बहाली की मांग कर रहे हैं। लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान के नेता पीसी विश्वकर्मा ने 25 दिसंबर को दिल्ली के जंतर मंतर में अकेले ही धरना देकर चेतावनी दी थी कि यदि जनवरी में ट्रेनें शुरू नहीं हुईं तो फरवरी में फिर से आंदोलन और धरना दिया जाएगा। विश्वकर्मा ने दिल्ली से लौटने के बाद वीरवार को नगरोटा सूरियां विश्रामगृह में मीडिया को बताया कि अगस्त 2022 में चक्की नदी पर पुल टूटने के बाद से रेल सेवा बंद है। इससे कांगड़ा घाटी के लाखों लोगों की कनेक्टिविटी प्रभावित है। पुल की मरम्मत लगभग पूरी हो चुकी है और जल्द उद्घाटन की उम्मीद है, लेकिन रेलवे की ओर से बार-बार तारीखें आगे बढ़ाई जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि 25 दिसंबर को उन्होंने दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दिया तो इसका संज्ञान लेते हुए उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक अशोक कुमार ने आश्वासन दिया है कि 26 जनवरी तक पठानकोट से जोगिंद्रनगर तक चलने वाली सभी ट्रेनों को बहाल कर दिया जाएगा। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि 26 जनवरी तक सेवा बहाल हो जाए। विश्वकर्मा ने कहा कि इस लाइन को ब्रॉडगेज में बदलने की योजना है, लेकिन कुछ लोग हेरिटेज और पर्यावरण को देखते हुए नैरो गेज को ही बेहतर मानते हैं और व्यापक मूल्यांकन की मांग कर रहे हैं।