घरद्वार पर ही बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाने के सरकारी दावे जमीनी स्तर पर खोखले साबित हो रहे हैं। ज्वाली उपमंडल के अंतर्गत पड़ने वाले राजकीय उच्च पाठशाला बेही पठियार में बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते बच्चों को मजबूरन करीब 10 से 12 किलोमीटर पैदल सफर तय करना पड़ता है।
जबकि बेही पठियार हाई स्कूल में हेडमास्टर समेत टीजीटी आर्ट्स, ड्राइंग व भाषा अध्यापक (हिंदी) के पद अरसे से रिक्त होने के चलते बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। वहीं, स्कूल में लैब असिस्टेंट और क्लर्क का भी पद रिक्त चल रहा है। हालांकि, पिछले साल बेही पठियार हाई स्कूल को स्तरोन्नत कर जमा दो का दर्जा देने की भी घोषणा की गई थी, लेकिन आज दिन तक न तो जमा दो की क्लासें शुरू हो पाई हैं और न ही रिक्त चल रहे स्टाफ के पदों को भरा जा सका है।
आलम यह है कि स्कूल में कमरों के अभाव में दो क्लासों के बच्चों को खुले आसमान के नीचे बैठना पड़ता है। मौजूदा पुराने जर्जर भवन में सिर्फ सात कमरे होने से बच्चों को परेशानी होती है। स्कूल में इस समय करीब 160 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं लेकिन दसवीं पास करने के बाद बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए अमनी, जौंटा या मिजग्रां की ओर रुख करना पड़ता है।
यहां पहुंचने के लिए बच्चों को करीब 10 से 12 किलोमीटर का पैदल सफर तय करना पड़ता है। दरअसल, स्कूल के समय पर बस सेवा न होने के कारण बच्चों को पैदल जंगल के रास्ते से होकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। ऐसे में खासकर लड़कियों को उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उधर, कार्यवाहक हेडमास्टर वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि स्कूल में रिक्त पड़े स्टाफ के पदों को भरने के लिए उच्च अधिकारियों को लिखा गया है।