धर्मशाला। उत्तर भारत के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में शुमार डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी से स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर दबाव बना हुआ है। अस्पताल में ओपीडी और भर्ती मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के बीच वर्तमान में करीब 350 अतिरिक्त स्टाफ नर्सों की आवश्यकता है। हालांकि हाल ही में प्रदेश सरकार की ओर से टांडा अस्पताल के लिए 160 स्टाफ नर्सों की तैनाती की गई है लेकिन विशाल परिसर और भारी वर्कलोड के मुकाबले यह संख्या नाकाफी साबित हो रही है।
टांडा अस्पताल में कांगड़ा सहित चंबा, हमीरपुर, मंडी और कुल्लू जिलों से रोजाना हजारों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल के सामान्य वार्डों, आईसीयू, आपातकालीन विंग, डायलिसिस यूनिट और ऑपरेशन थियेटरों में नर्सिंग स्टाफ रीढ़ की तरह काम करता है। मरीज को भर्ती करने से लेकर समय पर दवाइयां देने, इंजेक्शन लगाने, वाइटल्स मॉनिटर करने और क्रिटिकल केयर में डॉक्टरों के साथ समन्वय बनाने तक का पूरा जिम्मा स्टाफ नर्सों पर ही होता है।
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मौजूदा स्टाफ पर दोगुना बोझ, तीमारदार भी परेशान
मौजूदा नर्सिंग कर्मियों पर काम का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। विशेषकर आईसीयू और पोस्ट-ऑपरेटिव वार्ड्स में जहां प्रति मरीज समर्पित नर्सिंग केयर की जरूरत होती है, वहां एक-एक नर्स को कई-कई गंभीर मरीजों की निगरानी करनी पड़ रही है। इस अत्यधिक दबाव का सीधा असर मरीज देखभाल सेवाओं पर पड़ रहा है और कई बार सामान्य प्रक्रियाओं के लिए भी तीमारदारों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में वर्तमान में करीब 350 अतिरिक्त स्टाफ नर्सों की आवश्यकता है। लंबे समय से पद खाली रहने के कारण सेवारत नर्सिंग कर्मियों पर काम का दबाव बहुत अधिक बढ़ गया है। सरकार की ओर से हाल ही में 160 नर्सों की नियुक्ति की गई है जिससे कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में पदों को भरने की दरकार है। इस संबंध में वस्तुस्थिति से सरकार को लिखित रूप में अवगत करवा दिया गया है। -डॉ. मिलाप शर्मा, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, टांडा