धर्मशाला। आने वाले वर्षों में कांगड़ा के बगीचों में दशहरी और मलिका आम की मिठास और अधिक बढ़ने वाली है। जिले के किसान अब पारंपरिक आम की बजाय अधिक उत्पादन और बेहतर बाजार मूल्य देने वाली उन्नत किस्मों को प्राथमिकता दे रहे हैं। उद्यान विभाग की चार सरकारी नर्सरियों से इन पौधों की रिकॉर्ड बिक्री किसानों के बदलते रुझान की साफ तस्वीर पेश कर रही है।
कांगड़ा जिले में उद्यान विभाग की ओर से अब तक कुल 24,185 फलदार पौधे बेचे जा चुके हैं। इनमें सबसे अधिक मांग आम की किस्मों की रही। 15 जुलाई से अब तक आम के कुल 8,567 पौधे बिके हैं, जिनमें अकेले दशहरी के 3,281 और मलिका के 2,675 पौधे शामिल हैं। इसके अलावा किसानों ने लीची के 3,351 और नींबू प्रजाति (मालटा, संतरा, गलगल) के 7,693 पौधे खरीदे हैं।
विभाग की गुम्मर नर्सरी से 13,007, बड़ोह से 5,263, जाच्छ से 3,307 और इंदपुर नर्सरी से 2,608 पौधे बेचे जा चुके हैं। कुल तैयार 62,406 पौधों में से अभी भी 38,221 फलदार पौधे उपलब्ध हैं, जिन्हें किसान तय दरों पर संबंधित ब्लॉक अधिकारी से संपर्क कर प्राप्त कर सकते हैं।
इसलिए खास हैं दशहरी और मलिका
दशहरी आम अपने रसीले गूदे, कम रेशे और मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है। वहीं, मलिका एक उन्नत संकर (हाइब्रिड) किस्म है, जिसके फल आकार में बड़े, अधिक मीठे और देर से पकने वाले होते हैं। जब बाजार में सामान्य आम की आवक कम हो जाती है, तब मलिका आम किसानों को बेहतर दाम दिलाता है।
जमीन में पर्याप्त नमी होने के कारण पौधरोपण के लिए यह सही समय है। यदि बरसात लंबी चलती है तो किसान 15 सितंबर तक पौधरोपण कर सकते हैं। बारिश कम होने की स्थिति में अगस्त के अंत तक रोपण पूरा कर लें। -डॉ. अलक्ष पठानिया, उपनिदेशक, उद्यान विभाग कांगड़ा