फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमर उजाला ‘संवाद’ : ओबीसी वर्ग को आरक्षण का पूरा लाभ देने में सरकारें रहीं नाकाम

विज्ञापन
विज्ञापन
धर्मशाला। पालमपुर स्थित हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय का नाम चौधरी सरवण कुमार के नाम पर रखा गया है। मगर जिस ओबीसी समुदाय से वे संबंध रखते थे, उस वर्ग के विद्यार्थियों को इस विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए आरक्षण का लाभ नहीं मिल रहा। प्रदेश में ओबीसी वर्ग की 48 जातियां में बंटा हुआ है, लेकिन उन्हें आज तक आरक्षण का पूरा लाभ नहीं दिया गया।
विज्ञापन


धर्मशाला में आयोजित अमर उजाला ‘संवाद’ कार्यक्रम में समुदाय के प्रतिष्ठित वक्ताओं ने इस मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखी। घृत बाहती चाहंग महासभा के प्रदेशाध्यक्ष श्रीकंठ चौधरी, ओबीसी कल्याण मंडल के अध्यक्ष कर्नल (रि.) स्वरूप कोहली, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य मोहिंद्र चौधरी और अधिवक्ता बिक्रम चौधरी ने ओबीसी वर्ग की समस्याओं और अनदेखी पर खासी नाराजगी जताई।

उन्होंने कहा कि संविधान के 93वें संशोधन की नोटिफिकेशन को वर्षों पहले जारी किया गया था, लेकिन इसे लागू करने में अब तक किसी भी सरकार ने रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी अन्य समुदाय के विरोधी नहीं हैं, बल्कि अपने समुदाय के हक और अधिकारों को लागू करवाने की मांग कर रहे हैं।
विज्ञापन




शिक्षा क्षेत्र में आरक्षण देने में अलग-अलग मापदंड : श्रीकंठ

घृत बाहती चाहंग महासभा के प्रदेशाध्यक्ष श्रीकंठ चौधरी ने कहा कि सरकारों की बेरुखी के कारण अभी तक 93वें संशोधन को लागू न करना समुदाय के लिए हानिकारक साबित हुआ है। प्रदेश के शैक्षणिक क्षेत्र में आरक्षण देने के लिए अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं। तकनीकी शिक्षा में तो 18 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, मेडिकल कॉलेज में मात्र दो सीटें आरक्षित हैं। मगर प्रदेश कृषि विवि, जिसके लिए चौधरी समुदाय को जाना जाता है, वहां पर आरक्षण की सुविधा शून्य है।



हकों के लिए लड़ना भूल पार्टियों में बंटे लोग : कर्नल कोहली

ओबीसी कल्याण मंडल के प्रदेशाध्यक्ष कर्नल स्वरूप कोहली ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस और भाजपा सरकारों में ओबीसी वर्ग से संबंधित कई नेता कैबिनेट में शामिल हुए, लेकिन वे वर्ग की आवाज को बुलंद ही नहीं करवा पाए। वोटों के दौरान वर्ग से संबंधित नेता मांगें उठाने की बात करते हैं, लेकिन जीतने के बाद वे भूल जाते हैं कि समुदाय से क्या-क्या वायदे करके वे सत्ता में आए हैं। आज ओबीसी वर्ग के लोग हकों के लिए लड़ना भूल कर पार्टियों में बंट गए हैं।



नेताओं की रैलियों में मात्र भीड़ का हिस्सा : महेंद्र चौधरी

सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य एवं चौधरी फाउंडेशन के वरिष्ठ सलाहकार मोहिंद्र चौधरी ने कहा कि ओबीसी वर्ग अभी भी उच्च शिक्षा से अछूता है। अगर वे पढ़-लिख और कमीशन पास कर आगे पहुंच भी जाएं तो पर्सनल इंटरव्यू में कम अंक देकर बाहर का रास्ता दिखाया जाता है। समुदाय के लोग नेताओं की रैलियों में मात्र भीड़ का हिस्सा ही बनते हैं। इससे आगे उनका कोई वजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि एशियाई खेलों में मेडल जीत कर आने वाले अभ्यर्थियों को भी आज मजदूरी करनी पड़ती है।



कानूनों को लागू करने में सरकारें विफल : बिक्रम चौधरी

अधिवक्ता बिक्रम चौधरी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम में चेयरमैन का पद दो सालों से खाली है। प्रदेश लोक सेवा आयोग और हिमाचल प्रदेश चयन आयोग में ओबीसी समुदाय से कोई प्रतिनिधि नहीं है। ओबीसी वर्ग को कानूनों और कोर्ट के जरिए मिले हकों को लागू करने में सभी सरकारें विफल रही हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी जातिगत आधार पर जनगणना करवाने की बात कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार इसे अनसुना कर इस ओर कोई भी कार्रवाई नहीं कर पाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें