धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में अवैध कब्जों को नियमित करने की पॉलिसी निरस्त होने से लाखों परिवारों में बेचैनी और भय का माहौल है। सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता अतुल भारद्वाज ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि वह जल्द से जल्द ऐसी पॉलिसी बनाए, जिससे अवैध कब्जों वाले परिवारों को राहत मिल सके और वे उजड़ने के डर से मुक्त हो सकें।
अतुल भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश में लगभग 1.67 लाख ऐसे परिवार हैं, जिन्होंने 2002 की पॉलिसी के तहत अपने कब्जों को नियमित करने के लिए आवेदन किया था। हाईकोर्ट ने इन परिवारों के कब्जों को हटाने के 28 फरवरी 2026 तक के निर्देश दिए हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक स्थिति यथावत रखने के आदेश जारी किए हैं, जिससे लोगों को कुछ हद तक राहत मिली है।
कांगड़ा जिले में लगभग 35 हजार परिवार इन दिनों उजड़ने के भय से भयभीत हैं और सरकार से राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि बरसात और बादल फटने के कारण कई जगहों पर जमीन और मकान बह गए हैं। ऐसे में भूमिहीनों को तो भूमि अलॉट की जा सकती है, लेकिन अन्य प्रभावित परिवारों के लिए कोई पॉलिसी नहीं है। अतुल भारद्वाज ने कहा कि सरकार को तुरंत कोई ऐसी पॉलिसी बनानी चाहिए, जिससे पात्र लोगों को फायदा मिले और उनकी जान-माल सुरक्षित रहे।