घृत मंडल के आखिरी दिन दर्शनों के लिए लगी श्रद्धालुओं की लाइन
कांगड़ा/बैजनाथ। शक्तिपीठ बज्रेश्वरी देवी मंदिर कांगड़ा और बैजनाथ के शिव मंदिर में पिछले सात दिन से आयोजित घृत मंडल पर्व विधि विधान से संपन्न हो गया। सोमवार तड़के मंदिर के पुजारियों ने पाठ पूजास्थल मां बज्रेश्वरी की पिंडी पर चढ़े करीब 21 क्विंटल मक्खन को उतार दिया। श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन के बाद मक्खन रूपी प्रसाद लिया। वहीं, बैजनाथ शिव मंदिर में सुबह चार बजे आरती कर ढाई क्विंटल घृत मंडल को उतारा।
मकर संक्रांति का यह पर्व दैवीय काल से मनाया जा रहा है। पौराणिक मतों के अनुसार जालंधर दैत्य से युद्ध के दौरान माता सती को चोटें आई थीं। इन घावों को भरने के लिए मक्खन से लेप किया गया था।
इस परंपरा का निर्वहन आज भी किया जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि प्रसाद रूपी इस मक्खन को खाया ही नहीं जाता, अपितु शरीर पर लगाने से यह प्रसाद चर्म रोगों में रामबाण का काम करता है।
कांगड़ा मंदिर अधिकारी नीलम राणा ने बताया कि घृत मंडल पर्व संपन्न होने के बाद मक्खन का प्रसाद श्रद्धालुओं में बांटा जा रहा है। पर्व संपन्न होने के दिन सोमवार को करीब 5,000 श्रद्धालुओं ने कांगड़ा में बज्रेश्वरी देवी के दर्शन किए।
घृत मंडल के आखिरी दिन दर्शनों के लिए लगी श्रद्धालुओं की लाइन