धर्मशाला। अगर आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखना है, तो समस्या उभरने का इंतजार करने के बजाय समय पर नेत्र जांच करवाना अनिवार्य है। यह बात मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कांगड़ा डॉ. ओमेश भारती ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित नेत्र देखभाल जागरूकता पखवाड़े के तहत कही। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान और उचित उपचार से दृष्टि संबंधी अधिकांश गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।
सीएमओ ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों और नजर की कमजोरी से जूझ रहे लोगों को नियमित जांच के प्रति बिल्कुल भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों का सीधा असर आंखों की नसों पर पड़ता है, इसलिए ऐसे मरीजों को नियमित अंतराल पर डॉक्टर से परामर्श लेते रहना चाहिए।
डॉ. भारती ने लगातार मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी स्क्रीन देखने वालों को बीच-बीच में आंखों को विश्राम देने और बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित करने की सलाह दी। स्क्रीन पर अधिक समय बिताने से आंखों में सूखापन, थकान और जलन की शिकायत हो सकती है। खुजली या जलन होने पर आंखों को मसलने के बजाय विशेषज्ञ को दिखाएं और बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी आई ड्रॉप का प्रयोग न करें।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ आंखों के लिए पौष्टिक आहार लें तथा धूप, धूल और प्रदूषण से बचाव के लिए उचित चश्मे का इस्तेमाल करें। अचानक नजर कमजोर होना, तेज दर्द, अत्यधिक लाली या चमक दिखाई देना गंभीर संकेत हैं, ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें।