कांगड़ा। जन्म से बहरेपन के शिकार मरीजों में दोबारा सुनने की क्षमता तैयार करने के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज में कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की शुरुआत हो गई है। शुक्रवार को 14 महीने के बच्चे की अस्पताल में सफल सर्जरी की गई। मेडिकल कॉलेज में पहली बार इस उम्र में इस प्रकार की सर्जरी की गई है। यह बच्चा अब आसानी से सुन सकेगा। सर्जरी ईएनटी विभाग के डॉ. मुनीश सरोच और उनकी सर्जनों की टीम ने की। 9 से 11 जुलाई तक आयोजित तीन दिवसीय कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यशाला में यह सर्जरी की गई।
इससे न सुनने की बीमारी से पीड़ित बच्चों में भी आशा का किरण जगी है। कार्यशाला के दौरान बच्चे समेत तीन मरीजों की कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की गई। इसमें दो मरीजों को द्विपक्षीय कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी और एक की एकपक्षीय इम्प्लांट सर्जरी की गई। डॉ. मुनीश सरोच ने बताया कि कार्यशाला न केवल एक क्लीनिकल सफलता थी, बल्कि यह सभी प्रतिभागियों के लिए एक अकादमिक समृद्धि भी थी। लाइव सर्जिकल प्रदर्शन, इंटरएक्टिव सत्र और केस चर्चा ने ईएनटी पेशेवरों और पोस्टग्रेजुएट छात्रों के लिए ज्ञान साझा कर और हाथों-हाथ जोखिम की अनुमति दी।