पालमपुर (कांगड़ा)। प्रदेश के सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों के लिए पहली अक्तूबर से वर्दी अनिवार्य करने के सरकारी निर्देश पर जिला स्कूल प्रवक्ता संघ ने एतराज जताते हुए पुनर्विचार की मांग उठाई है। संघ ने इस व्यवस्था को आनन-फानन में लागू करने के बजाय आगामी नए शैक्षणिक सत्र से शुरू करने की बात कही है।
संघ के अध्यक्ष सिकंदर मिन्हास व अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी अधिसूचना के तहत सीबीएसई स्कूलों में कार्यरत अध्यापकों के लिए पहली अक्तूबर से वर्दी पहनना अनिवार्य किया गया है। निर्धारित रंग का कपड़ा बाजार में उपलब्ध नहीं होने के कारण शिक्षक वर्दी तैयार करवाने में असमंजस में हैं।
इसके अलावा सीबीएसई स्कूलों में कार्यरत कई शिक्षक सीबीएसई परीक्षा दे चुके हैं, जबकि कुछ ने परीक्षा नहीं दी है। ऐसे में उनकी वर्तमान विद्यालयों में नियुक्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसी बीच वर्दी खरीदने की अनिवार्यता से शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
संघ ने स्पष्ट किया कि वह विभाग की ओर से अनुमोदित वर्दी व्यवस्था के विरोध में नहीं है। उसकी मांग है कि पहले निर्धारित वर्दी का कपड़ा बाजार में उपलब्ध करवाया जाए और कार्यरत शिक्षकों की नियुक्ति संबंधी स्थिति स्पष्ट की जाए। इसके बाद ही नई व्यवस्था लागू की जाए। सिकंदर मिन्हास ने कहा कि विभागीय आदेशों को लेकर शिक्षकों में अनावश्यक तनाव की स्थिति नहीं बननी चाहिए। उन्होंने मांग की कि वर्दी संबंधी आदेश को या तो तत्काल वापस लिया जाए या शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने तक लंबित रखा जाए।