धर्मशाला। दिवाली पर आतिशबाजी के दौरान हादसों से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। पटाखे जलाते समय सिंथेटिक और ढीले कपड़ों से परहेज करने के साथ सूती कपड़े पहनने को कहा गया है।
वहीं, आपात स्थिति से निपटने के लिए जिले के सभी सिविल अस्पतालों, क्षेत्रीय अस्पताल और मेडिकल कॉलेज टांडा में आपाताकालीन सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पटाखे से जलने पर प्रभावित हिस्से को करीब 20 मिनट तक ठंडे बहते पानी से धोना चाहिए। जले स्थान पर बर्फ, घी, तेल या टूथपेस्ट नहीं लगाना चाहिए। घाव को साफ कपड़े से ढककर तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।
मेडिकल कॉलेज टांडा में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के उपचार के लिए बर्न यूनिट भी उपलब्ध है। क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला की एमएस डॉ. अनुराधा शर्मा ने बताया कि आंख में पटाखे का कण जाने पर उसे रगड़ें नहीं और न ही खुद निकालने का प्रयास करें। आंख को बिना दबाव दिए सुरक्षित रखकर तुरंत अस्पताल पहुंचें। चेहरे पर जलने, गहरे घाव या सांस लेने में परेशानी होने पर भी तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
पटाखे जलाते समय रखें ध्यान
खुले स्थान पर पटाखे जलाएं और पास में पानी रखें।
सूती और शरीर से सटे कपड़े पहनें।
बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें।
पटाखे जलाने के लिए लंबी मोमबत्ती या अगरबत्ती इस्तेमाल करें।
नहीं जलने वाले पटाखों को दोबारा जलाने का प्रयास न करें।
पटाखे हाथ में पकड़कर या जेब में रखकर न जलाएं।
आतिशबाजी के बाद हाथ धोएं और आंखों को न छुएं।