जाच्छ में किसानों की तकनीक सिखाते हुए विशेषज्ञ। -संवाद
जसूर/राजा का तालाब (कांगड़ा)। डॉ. यशवंत सिंह परमार विश्वविद्यालय के जाच्छ अनुसंधान केंद्र में अनुसूचित जाति से संबंधित किसानों के लिए राष्ट्रीय कृषि वानिकी परियोजना के तहत दो दिवसीय आवासीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्घाटन क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान केंद्र जाच्छ के सह-निदेशक डॉ. विपिन गुलेरिया ने किया।
कार्यशाला में डॉ. विपिन गुलेरिया ने कहा कि कृषि वानिकी के माध्यम से किसान कम भूमि पर अधिक आय अर्जित कर सके हैं। उन्होंने इसके तरीके भी सिखाए। किसानों को चारे, लकड़ी और फलों की बहु वर्षीय फसलें जैसे तूनी, लसूड़ा, जैसे फलों के साथ औषधीय पौधे, सब्जियां, ड्रैगन फ्रूट इत्यादि की मिश्रित खेती करने की जानकारी दी गई। कार्यशाला में वानिकी महाविद्यालय के पूर्व डीन डॉ. संजीव ठाकुर ने किसानों को पेड़ों से कम समय में अधिक उपज से आर्थिक स्थिति को सुधारने के टिप्स दिए।
ड्रैगन फ्रूट को कृषि में सम्मिलित करने के लिए उन्नत किसान जीवन सिंह राणा ने किसानों को ड्रैगन लगाने की विधि एवं उसकी उपज से होने वाले आर्थिक लाभों की जानकारी दी। समापन पर कृषि विभाग के विषय विशेषज्ञ डॉ. शैलेश सूद भी उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों को कृषि और कृषि वानिकी एवं बांस संबंधित परियोजनाओं का लाभ लेने के लिए आगे आने का आह्वान किया।