रक्कड़ के तहत पड़ने वाले गांव चपलाह के में चल रही श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन उपस्थित संगत। स
रक्कड़ (कांगड़ा)। बहाने से लिया गया भगवान का नाम भी जीवन में मोक्ष का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। यह बात परागपुर के प्रसिद्ध विद्वान पंडित सुमित शास्त्री ने तहसील रक्कड़ के अंतर्गत गांव चपलाह में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर कही।
उन्होंने कथा प्रसंग के दौरान अजामिल चरित्र का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे दासी के संसर्ग में पड़कर उसका जीवन पथभ्रष्ट हो गया, लेकिन संतान के बहाने भगवान नारायण का नाम लेने से उसकी सदगति हो गई। उन्होंने बताया कि संतों की प्रेरणा से अजामिल ने अपनी संतान का नाम ‘नारायण’ रखा था। अंत समय में जब उसने पुत्र को पुकारा, तब अनजाने में भी भगवान का स्मरण हो गया और उसे मोक्ष प्राप्त हुआ।
इसके बाद कथा में मरुद्गणों, भक्त प्रह्लाद, बलि-बामन चरित्र तथा श्रीकृष्ण जन्म की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के बीच गाए गए भजन ‘मीठे रस से भरयो री राधा रानी लागे’ तथा ‘अज मथुरा दे विच अवतार हो गया, श्याम निक्का जेहा’ ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। भक्त भावविभोर होकर झूमते नज़र आए।