खट्टा के जरिये धवाला को कमजोर करने की तैयारी
ओबीसी समाज से संबंध रखते हैं धवाला और खट्टा
अजय खट्टा को जिलाध्यक्ष बनाकर पूर्व मंत्री रविंद्र रवि बने किंग मेकर
सतीश डढवाल
देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। तमाम कयासों को दरकिनार कर भाजपा ने संगठनात्मक जिला देहरा का अध्यक्ष सेवानिवृत्त इंजीनियर अजय खट्टा को नियुक्त किया है। भाजपा ने ज्वालामुखी और देहरा हलके की कमजोर कड़ियों की मरम्मत के लिए एक इंजीनियर पर विश्वास जताया है। देखना होगा कि वे भाजपा आलाकमान के विश्वास पर कितना खरा उतरते हैं।
माना जा रहा है कि नवनियुक्त अजय खट्टा पूर्व मंत्री रविंद्र सिंह रवि के करीबी हैं और उन्होंने ही इससे पहले उन्हें ज्वालामुखी के मंडलाध्यक्ष के ताज से नवाजा था। नवनियुक्त जिलाध्यक्ष अजय खट्टा ओबीसी वर्ग से आते हैं। इसलिए राजनीति के माहिर मानते हैं कि अजय खट्टा की नियुक्ति के पीछे ओबीसी नेता और पूर्व मंत्री रमेश धवाला का ज्वालामुखी और देहरा हलके में ओबीसी समाज पर दबदबे को कमजोर करने की योजना है।
पूर्व मंत्री रमेश धवाला के कमजोर होने का सीधा फायदा पूर्व मंत्री रविंद्र सिंह रवि को ज्वालामुखी में और होशियार सिंह को देहरा में होगा। आजकल वैसे भी रमेश धवाला के तीखे तेवरों से प्रदेश भाजपा आलाकमान असहज है। वहीं, दूसरे तरफ काफी समय से भाजपा की राजनीति से हाशिये पर चल रहे पूर्व मंत्री रविंद्र सिंह रवि अचानक किंग मेकर बनकर उभरे हैं।
साल 2022 के चुनाव में रमेश धवाला ज्वालामुखी हलके को छोड़कर देहरा हलके से चुनाव लड़े थे। चुनाव में वे तीसरे नंबर रहे थे। इसके बाद से ही धवाला की पकड़ ज्वालामुखी हलके में कमजोर होना शुरू हो गई। मौका देखकर रविंद्र रवि ने ज्वालामुखी भाजपा संगठन पर अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू की और अपने विश्वासपात्र अजय खट्टा को ज्वालामुखी मंडल का मंडलाध्यक्ष बनाया। उसके बाद रवि ने दो दिन पहले हुए ज्वालामुखी भाजपा मंडलाध्यक्ष के चुनाव में विश्वासपात्र अजय राणा और सरोज कुमारी को मंडलाध्यक्ष बनाया। वे यहीं नहीं रुके, उन्होंने अपने विश्वासपात्र अजय खट्टा को देहरा भाजपा का जिलाध्यक्ष बना दिया। माना जा रहा है कि रविंद्र सिंह रवि देहरा और ज्वालामुखी हलके पर जिलाध्यक्ष के जरिये अपनी पकड़ को ओर मजबूत करेंगे। जिससे उपचुनाव में भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले होशियार सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्योंकि जगजाहिर है की रवि और होशियार के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। रविवार को जिलाध्यक्ष के चुनाव के लिए रखी गई बैठक में होशियार और धवाला के नदारद रहने से चर्चाओं का दौर गरम है कि अब दोनों नेताओं की राह आसान नहीं है।