रविंद्र अत्री, अध्यक्ष, करूणामूलक आश्रित संघ।
कांगड़ा। कांग्रेस ने वादा किया था कि सत्ता में आते ही करुणामूलक आश्रितों को बिना शर्त सरकारी नौकरी दी जाएगी। मगर अब आश्रित स्वयं को ठगा और असहाय महसूस कर रहे हैं। यह आरोप करुणामूलक आश्रित संघ के अध्यक्ष रविंद्र अत्री ने शनिवार को प्रेस बयान में लगाया।
अत्री ने बताया कि 30 जुलाई को कैबिनेट ने करुणामूलक विषय पर वार्षिक आय सीमा 2.50 लाख से बढ़ाकर 3 लाख कर दी जो सरासर गलत है। इसके चलते करीब 1500 आश्रित दायरे से बाहर हो रहे हैं। सरकार का दावा है कि विभाग, बोर्डों, निगमों और अन्य दफ्तरों में केवल 1609 मामले लंबित हैं, जबकि वास्तविक संख्या करीब 3500 है।
संघ ने मांग रखी है कि वार्षिक आय सीमा को 5 लाख तक फ्लैट किया जाए या सभी आश्रितों को एकमुश्त नौकरी प्रदान की जाए। साथ ही एक सदस्य की सालाना आय की शर्त हटाने, रद्द मामलों की तुरंत समीक्षा कर नई अधिसूचना जारी करने और 5 प्रतिशत कोटे की बाध्यता को खत्म करने की भी मांग की गई है।