पालमपुर (कांगड़ा)। सर्दियों की पहली ही बारिश ने बिजली बोर्ड के उन दावों की हवा निकाल दी है, जिनमें सुचारू आपूर्ति की बात कही जाती थी। बारिश और तकनीकी खराबी के कारण पालमपुर के अपर मैंझा गांव में लोगों को लगभग 40 घंटे तक बिना बिजली के अंधेरे में रहना पड़ा। बिजली आपूर्ति ठप होने से न केवल बोर्ड को आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि कड़ाके की ठंड के बीच आम जनता में भी आक्रोश बढ़ गया है।
ग्रामीणों के अनुसार बिजली गुल रहने का सबसे बुरा असर स्कूली बच्चों पर पड़ा। इन दिनों छात्र वार्षिक परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे हैं, लेकिन दो दिनों तक बिजली न होने के कारण उनकी पढ़ाई पूरी तरह बाधित रही। वहीं, भीषण ठंड और पहाड़ियों पर हो रही बर्फबारी के बीच हीटर न चलने के कारण बुजुर्गों और बच्चों को भारी मुसीबत झेलनी पड़ी।
गांव के रविंद्र राणा, अश्वनी कुमार, राजेश और अर्जुन सिंह सहित अन्य लोगों ने रोष प्रकट करते हुए बताया कि वीरवार रात करीब 11 बजे बिजली गुल हुई थी, जिसे बोर्ड ने कड़ी मशक्कत के बाद शनिवार दोपहर 2 बजे बहाल किया। स्थानीय लोगों ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपदा की स्थिति से निपटने के लिए बोर्ड के पास कोई वैकल्पिक योजना नहीं थी।
बारिश और खराब मौसम के कारण कई स्थानों पर बिजली की मुख्य लाइनों और तारों को नुकसान पहुंचा था। तकनीकी टीम ने कड़ी मेहनत के बाद अब सभी प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी है। -रजनीश कुमार, एसडीओ, बिजली बोर्ड