संवाद न्यूज एजेंसी
बिझड़ी (हमीरपुर)। विद्युत बोर्ड पेंशनर्स फोरम इकाई बड़सर की बैठक वरिष्ठ उपाध्यक्ष मेहर सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में पेंशनर्स ने विद्युत बोर्ड प्रबंधन से लंबित सभी वित्तीय लाभ ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट व अन्य भुगतान प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र करने की मांग उठाई।
प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि हाल ही में विद्युत बोर्ड लिमिटेड के निदेशक (वित्त) अरिंदम चौधरी और मुख्य लेखाधिकारी के साथ हुई बैठक में सितंबर 2024 तक लंबित भुगतान इसी माह जारी करने पर सहमति बनी है। प्रदेश में लागू की जा रही स्मार्ट मीटरिंग बिजली कानून 2003 के प्रावधानों के विपरीत है। उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल के संसद में दिए बयान का हवाला दिया कि स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं हैं। उपभोक्ता के विरोध पर इन्हें हटाया भी जा सकता है।
उन्होंने कहा कि नए कनेक्शन और खराब मीटर बदलने के नाम पर स्मार्ट मीटर लगाने के आदेश नियमों के खिलाफ हैं। इन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। बोर्ड प्रबंधन की ओर से लगभग 2500 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए जा चुके हैं जबकि केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत योजना लगभग 1800 करोड़ रुपये की है। इस अंतर से बोर्ड को करीब 700 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है। फोरम ने इस पूरी टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की है।
निजी कंपनियों की ओर से जिला स्तर पर संचालित डाटा सेंटर बंद कर उनके कार्य विद्युत बोर्ड के माध्यम से ही करवाने की भी मांग उठाई, ताकि आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरियां सुरक्षित रह सकें। बैठक में जिला संगठन सचिव ओम प्रकाश शर्मा, चैन सिंह ठाकुर, यूनिट सचिव राकेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में पेंशनर्स उपस्थित रहे।